रक्त एक प्रकार का द्रव्य संयोजी उत्तक है। एक स्वस्थ मनुष्य में यह 5,6 लीटर तक पाया जाता है। मानव शरीर में रक्त की मात्रा शरीर के भाग का 7 प्रतिशत होती है। यह हल्का छारीय होता है। इसका ph मान 7.4 होता है। इसमें दो प्रकार के पदार्थ पाए जाते हैं।
(1) रुधिर कोशिकाएँ
(2) प्लाज्मा।
रक्ततोत्पादन (Haematopoiesis)
(1) रक्त कोशिकाओं का निर्माण लाल अस्ती मज्जा (Bone Marrow), लसिका ग्रंथियों (Lymphatic Glands) तथा प्लीहा (Spleen) में होता है।
(2) लाल अस्थि मज्जा युवा व्यक्तियों की छोटी एवं चिपटी अस्तियों में स्पंजी पदार्थ के रिक्त स्थानों (lnterstices) में पाया जाता है।
(3) भ्रूण एवं नवजात शिशुओं में यह नलिकाकार अस्थियों (Tubular Bones) के भीतर भी पायी जाती है।
लाल रक्त कण (Red Blood corpuscles or RBC or Erythrocytes)
(1) इसके कोशिकाद्रव्य में एक प्रोटीन वर्णक रहता है, जिसे हिमोग्लोबिन (Haemoglobin) कहते हैं। इसी के चलते रक्त का रंग लाल होता है।
(2) इसका जीवनकाल लगभग चार महीने का होता है।
कार्य– शरीर की सभी कोशिका में ऑक्सीजन पहुँचाना व कार्बन डाइऑक्साइड को वापस लाना।
(1) फुफ्फुस में ऑक्सीजन ग्रहण कर उसे शरीर के विभिन्न अवयवों को प्रदान करना तथा
(2) उपापचय (Metabolism) के कारण ऊतकों में उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड का कुछ भाग फुफ्फुस तक पहुंचाना, जिसे श्वसन क्रिया द्वारा शरीर के बाहर निकाल दिया जाता है।
श्वेत रक्त कण (White Blood Corpuscles or WBC or Leucocytes)
(1) लाल रक्त कणों की अपेक्षा इनकी संख्या कम होती है।
(2) यह आकार में अमीबा के समान होता है। इसका जीवनकाल 2-4 दिन का होता है। इसका निर्माण अस्थि मज्जा लिम्फ नोड और यकृत व प्लीहा में भी होता है। इसका मुख्य कार्य शरीर को रोगों से बचाना होता है।
रक्त बिम्बाणु (Blood platelets or thrombocytes)
(1) इसका भी आकार अनियमित होता है।
(2) इनमें थ्राॅम्बोकाइनेज (Thrombokinase) नामक एक पदार्थ पाया जाता है, जो रक्त के जमने में मदद करता है।
हीमोग्लोबिन (Haemoglobin)
(1) लाल रक्त कण (RBC) के कोशिका द्रव्य में लोहा (Hame) तथा एक प्रोटीन वर्णक (Globin) रहता है, जिसे एक साथ हीमोग्लोबिन कहा जाता है। इसी के कारण रक्त का रंग लाल होता है।
प्लाज्मा (Plasma)– यह रक्त का मूल आधार है। वस्तुतः यह रक्त का जलीय भाग है। रक्त का लगभग 60 प्रतिशत भाग प्लाज्मा होता है। इसका मुख्य कार्य पचे हुए भोजन को शरीर में संवहन करता है।
(1) इसमें 90 प्रतिशत जल तथा 10 प्रतिशत अन्य कार्बनिक व अकार्बनिक पदार्थ होता है।
रक्त का जमना (Clotting of Blood)
(1) यह वस्तुतः एक भौतिक एवं रासायनिक प्रक्रिया है, जो सदैव हवा की उपस्थिति में ही होती है।
(2) रक्त में फाइब्रिनोजेन (प्रोटीन), थ्राॅम्बोजन (यकृत द्वारा विटामिन ए की मदद से निर्मित) आदि पदार्थ मौजूद रहते हैं।
(3) बिम्बाणु (Thrombocytes) में थ्राॅम्बोकाइनेज नामक एंजाइम उपस्थित रहता है, जिसके मुक्त होने से रक्त का जमाव संभव बन पाता है।
रक्त वर्ग (Blood Group)
(1) रक्त समूह की खोज लैड स्टीनर ने 1900 में की थी। इसके लिए 1930 में उन्हें ने नोबेल पुरस्कार भी मिला। रक्त समूह को 4 भागों में बाँटा है- AB, A, B व O | O रक्त समूह को 'सार्विक दाता' तथा AB रक्त समूह वालों को सार्विक अदाता कहते हैं।
Rh-Factor
(1) रक्त में 'A' एवं 'B' समूहजन के अलावा एक अन्य समूहजन भी होता है, जिस Rh-Factor कहते हैं।
(2) यह सर्वप्रथम रिसस (Rhesus) जाति के बंदर के रक्त में पाया जाता था।
(3) जिन व्यक्तियों के रक्त में यह समूहजन पाया जाता है, उन्हें Rh-Positive तथा जिनमें नहीं पाया जाता उन्हें Rh-Negative कहा जाता है।
प्लीहा(Spleen)
(1) WBCs तथा RBCs का विनाश इसी में होता है। यही कारण है कि प्लीहा को "लाल रक्त कणिकाओं" की कब्रगाह भी कहते हैं।
रुधिर वर्ग – एण्टीजन (RBC में ) – एण्टीबॉडी (प्लाज्मा में)
A – A – b
B – B – a
AB – A,B दोनों – कोई नहीं
O – कोई नहीं – a,b दोनों
आशा है, यह लेख परीक्षार्थियों के लिए उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगा।
धन्यवाद
Birbal Patle
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