यंग बंगाल आंदोलन
यह आन्दोलन वर्ष 1828 ई. में बंगाल में चलाया गया। यंग बंगाल आंदोलन का मूल संदर्भ देशी था, पंरन्तु इस पर विदेशी प्रभाव को मना नहीं किया जा सकता। यंग बंगाल के संस्थापक डेरोजियो स्वयं फ्रांस की क्रांति के सिद्धांतों से प्रभावित थे। साथ ही बंगाल के नौजवानों पर इटली के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रभाव था। यंग बंगाल आंदोलन के मुख्य उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता, ज़मींदारों के अत्याचारों से रैय्यतों की सुरक्षा, सरकारी उच्च सेवाओं में भारतीयों को रोज़गार दिलाना आदि थे। 19वीं सदी के तृतीय दशक के अंतिम वर्षों में बंगाल के बुद्धिजीवियों के मध्य एक रैडिकल ग्रुप संगठित हुआ, जिसके विचार अधिक क्रांतिकारी थे। इस आंदोलन को 'यंग बंगाल आंदोलन' के नाम से जाना जाता है। यंग बंगाल आंदोलन के प्रवर्तक हेनरी लुइस विवियन डेरोजियो थे। डेराजियो को आधुनिक भारत का प्रथम राष्ट्रवादी कवि' भी कहा जाता है।डेरोजियो ने अपने समर्थकों को सत्य के लिये जीने और मरने, सभी सद्गुणों को अपनाने और उनके अनुसार आचरण करने हेतु प्रोत्साहित किया।
डेरोजियो फ्राँस की क्रांति से बहुत प्रभावित थे। सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने डेरोजियो के अनुयायियों को 'बंगाल में आधुनिक सभ्यता के अग्रदूत', 'हमारी जाति का पिता' कहा। समाज सुधार के लिये डेरोजियो ने 'एकेडमिक एसोसिएशन' और 'सोसायटी फॉर द एक्वीजीशन ऑफ जनरल नॉलेज' जैसे संगठनों की स्थापना की। डेरोजियो ने समाचार पत्रों, पुस्तिकाओं और सार्वजनिक संगठनों के माध्यम से लोगों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर जागरूक करने के राजा राममोहन राय की परंपरा का अनुसरण किया। उन्होंने सार्वजनिक आंदोलन, जैसे- प्रेस की स्वतंत्रता, विदेश में ब्रिटिश उपनिवेशों में भारतीय श्रमिकों के लिये बेहतर स्थिति, बहुमत वाली ज्यूरी द्वारा मुकदमों की सुनवाई और भारतीयों को सरकारी सेवाओं में उच्च पद जैसे मुद्दों पर खुलकर बहस की। डेरोजियो के मुख्य शिष्यों में रामगोपाल घोष, कृष्ण मोहन बनर्जी एवं महेशचंद्र घोष थे।
आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
B B Patle
edubirbal.com
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