पदार्थ का वर्गीकरण
(Classification of Matter)
(i) भौतिक वर्गीकरण
(ii) रासायनिक वर्गीकरण
(i) पदार्थ की बाह्य रचना के आधार पर वर्गीकरण भौतिक वर्गीकरण कहलाता है, तथा भौतिक वर्गीकरण के अंतर्गत पदार्थ चार भागों में विभाजित किया जा सकता है-
1. ठोस
2. द्रव
3. गैस
4. प्लाज्मा।
(ii) पदार्थ की आंतरिक रचना के आधार पर वर्गीकरण रासायनिक वर्गीकरण कहलाता है। रासायनिक वर्गीकरण के अंतर्गत पदार्थ तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है-
1. तत्व
2. यौगिक
3. मिश्रण।
पदार्थ की अवस्थाएँ-
(States of Matter-)
"पदार्थ के अलग अलग रूप ही पदार्थ की अवस्था कहलाते हैं।"
सामान्यतः पदार्थ की तीन अवस्थाएँ होती हैं ठोस, द्रव, गैस। पदार्थ की चौथी अवस्था प्लाज्मा कहलाती है। यह अवस्था गर्म आयनित पदार्थ के रूप में पाई जाती है। यह अवस्था तारें में पाई जाती है। इनके अतिरिक्त पदार्थ की अन्य अवस्थाओं हेतु शोध कार्य जारी है जिनके बारे में आप अगली कक्षाओं में अध्ययन करेंगे।
पदार्थ की ठोस, द्रव और गैस अवस्था में ताप व दाब की परिस्थितियों के अनुसार, पदार्थ एक समय में किसी एक ही भौतिक अवस्था में पाया जाता है। किसी भी पदार्थ का ताप, दाब आदि परिवर्तित करके उसे एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बदला जा सकता है- जैसे जल की तीन अवस्था जिन्हें ताप परिवर्तन द्वारा एक-दूसरे में बदला जा सकता है-
बर्फ = 0°C से ऊपर , 0°C से नीचे जल = 100°C से ऊपर, 100°C से नीचे वाष्प
1. ठोस- वे पदार्थ जिनका आकार व आयतन निश्चित होता है ठोस कहलाते हैं।
2. द्रव- वे पदार्थ जिनका आयतन तो निश्चित होता है परन्तु आकार निश्चित नहीं होता है, द्रव कहलाते हैं।
3. गैस- गैस वे पदार्थ हैं जिनका आकार व आयतन दोनों निश्चित नहीं होते हैं, गैस कहलाते हैं।
4. प्लाज्या- पदार्थ की यह अवस्था वास्तव में अति तप्त गैसीय अवस्था मानी जाती है।
पदार्थ के गुण-
(Properties of matter-)
सामान्यतः हम बर्तनों का उपयोग द्रव तथा अन्य पदार्थों को रखने के लिए हैं और बर्तन, काँच, प्लास्टिक, धातु या किसी ऐसे पदार्थ से बनाए जाते हैं जिनसे पानी, द्रव या पदार्थ बाहर न निकले।
हम हर पदार्थ को उसके गुण एवं उपयोग के आधार पर बनाने के लिए चुनते हैं। आइए हम पदार्थ के कुछ गुणों की चर्चा करते हैं।
कठोरता-
(Hardness-)
आपने अनुभव किया होगा, यदि आप स्पंज को अंगूठे से दबाते हैं तो वह सरलता से दब जाता है, किन्तु पत्थर या लकड़ी को हम अंगूठे से नहीं दबा सकते। अतः हम यह कह सकते हैं कि पत्थर और लकड़ी, स्पंज से कठोर है। कठोरता ठोस का प्रमुख गुण है। द्रव या गैस में यह गुण नहीं पाया जाता।
जल में विलेयता-
(Solubility in water-)
आपने देखा होगा कि शक्कर और नमक सरलता से पानी में घुल जाते हैं जबकि लोहा, तांबा, और चाँदी पानी में नहीं घुलते। जो पदार्थ पूर्ण रूप से जल में घुल जाते हैं वे पदार्थ जल में विलेय पदार्थ कहलाते हैं और पदार्थ का यह गुण विलेयता कहलाता है। जो पदार्थ जल में नहीं घुलते वे पदार्थ जल में अविलेय पदार्थ कहलाते हैं। अधिकतर ठोस जल अविलेय होते हैं जैसे धातुएँ, पत्थर, लकड़ी आदि लेकिन धातु के कुछ लवण, नमक आदि जल में विलेय होते हैं।
अधिकतर द्रव, जल में अविलेय है लेकिन एल्कोहल, सिरका (एसिटिक एसिड) जल में विलेय होते हैं। अधिकतर गैसें जल में अविलेय हैं किन्तु सल्फर डाई ऑक्साइड, हाइड्रोजन, क्लोरीन और अमोनिया सरलता से जल में विलेय होती है। कार्बन डाई ऑक्साइड जल में आंशिक (कम) विलेय है।
पारदर्शिता-
(Transparency-)
जब आप लुका-छुपी खेलते हैं तो ऐसी जगह छुपना पसंद करते हैं जहां आपको कोई देख न सके। आप काँच के दरवाजे के पीछे क्यों नहीं छुपते? क्योंकि आप काँच से आरपार दिखाई देते हैं। वे पदार्थ जिनके आरपार देखा जा सकता है, पारदर्शी कहलाते हैं। पदार्थ के इस गुण का पारदर्शिता कहते हैं। जैसे काँच, जल, वायु आदि। वे पदार्थ जिनके आरपार नहीं देखा जा सकता है, अपारदर्शी कहलाते हैं- जैसे- लकड़ी, धातु आदि। वे पदार्थ जिनके द्वारा धुंधला या आंशिक रूप से आरपार देखा जा सकता है, पारभासी कहलाते हैं। जैसे- तेल लगा कागज, पोलीथीन, बटर पेपर, गहरा पानी, कोहरा, धुंध, वायु में धूल आदि।
ऊष्मा का चालन-
(conduction of heat-)
आपने भोजन पकाने के बर्तनों को देखा है। जैसे कुकर, दूध गर्म करने का बर्तन आदि। ये सभी विभिन्न धातुओं जैसे एल्यूमीनियम, तांबा, स्टील के बने होते हैं। लेकिन इनका हत्था (हेण्डल) लकड़ी या प्लास्टिक का बना होता है। क्यों?
क्योंकि धातुएं ऊष्मा की सुचालक होती है, लकड़ी और प्लास्टिक ऊष्मा की कुचालक।
वे पदार्थ जिनमें ऊष्मा का चाल होता है, सुचालक कहलाते हैं। जैसे- तांबा, स्टील, सोना, चाँदी आदि धातुएं। वे पदार्थ जिनमें ऊष्मा या ताप का चालन नहीं होता है, कुचालक कहलाते हैं। जैसे- लकड़ी, काँच, प्लास्टिक आदि।
लकड़ी या अधातुओं के समान द्रव तथा गैसें भी ऊष्मा की कुचालक होती हैं। वायु ऊष्मा की कुचालक होने के कारण ही ठंड में गर्म कपड़े पहनने के बाद वायु हमारे शरीर से ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देती है।
विघुत का चालक
(driver of electricity)
बटन दबाते ही बल्ब का जलना, मोटर का चलना, पंखे, कम्प्यूटर, टी.वी. और सभी विद्युत उपकरणों का चलना, चमत्कार जैसा लगता है। क्या कभी आपने इस बारे में विचार किया है? विद्युत का चालन जिन पदार्थों द्वारा होता है उनके तार बटन से विद्युत उपकरणों तक विद्युत पहुँचाते हैं। ये तार प्लास्टिक से ढके रहते हैं क्योंकि प्लास्टिक विद्युत की कुचालक होती है।
वे पदार्थ जिनके माध्यम से विद्युत प्रवाह या चालन होता है, विद्युत के सुचालक कहलाते हैं।
विद्युत का उत्पादन बड़े-बड़े विद्युत केंद्रों पर होता है। इन्हें पावर स्टेशन कहते हैं।
चुम्बक के प्रति आकर्षण-
(Attraction to Magnet-)
आपने देखा होगा बाजार में ऐसी बहुत सी वस्तुएँ मिलती हैं जो लोहे की अलमारी या लोहे से बने किसी भी पदार्थ से चिपक जाती है। जैसे छोटी-छोटी मूर्तियां, स्टिकर आदि। कभी सोचा वे लोहे की बनी वस्तुओं से ही क्यों चिपकती है क्योंकि उसमें चुम्बकीय गुण होता । वह पदार्थ जो सामान्य अवस्था में लोहे से बनी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है, है। चुम्बकीय पदार्थ कहलाता है।
वे पदार्थ जो चुम्बक के प्रति आकाणि रखते है चुम्बकीय पदार्थ कहलाते है।जैसे- लोहा, कोबाल्ट, निकिल से बने पदार्थ।
वे पदार्थ जो चुम्बक के प्रति आकर्षण नहीं रखते अचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। जैसे लकड़ी, प्लास्टिक, कपड़ा, ऊन आदि।
विसरण-
(diffusion-)
जब हम अगरबत्ती जलाते हैं तो उसकी सुगन्ध पूरे वातावरण में फैल जाती है। इसी प्रकार कई खाद्य पदार्थ बनाते समय उनकी गंध हम तक पहुँचती है। जैसे- चावल, हलवा, सब्जियाँ आदि।
गैस एवं द्रव के अणुओं का वातावरण में फैलना विसरण कहलाता है।
फल की सुगन्ध, फूल, प्याज, लहसून जो विशेष गंध देने वाले पदार्थ होते हैं वे वाष्प बनकर वायु में मिल जाते हैं। ये गंध वायु द्वारा हमारी नाक तक पहुँच जाती है। इसी प्रकार जीव-जन्तुओं और पदार्थों के सड़ने की दुर्गन्ध का भी पता चलता है।
ठोस और द्रव का जल में विसरण हो सकता है किन्तु सभी ठोस और द्रव का विसरण नहीं होता। यदि हम नीली स्याही की कुछ बूंदे पानी में डालें वह घुल जायेगी और पानी का रंग नीला हो जाएगा। गैसों का विसरण अत्यंत तीव्र गति से होता है।
आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
B B Patle
edubirbal.com
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