"किसी पैमाने द्वारा शुद्धतापूर्वक मापी जा सकने वाली न्यूनतम माप उस पैमाने का अल्पतमांक कहलाती है।"
अनियमित आकृतियों का क्षेत्रफल ज्ञान करना
जिस सरल विधि का उपयोग करके नियमित आकार के पृष्ठ का क्षेत्रफल ज्ञात किया जाता है, उस विधि का उपयोग अनियमित आकार के पृष्ठ का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिये नहीं किया जा सकता है। अनियमित आकार को वस्तुओं का निकटतम क्षेत्रफल ग्राफ पेपर द्वारा ज्ञात किया जा सकता है। एक ग्राफ पेपर लीजिए इसे ध्यान से देखिए। इसमें दो गाढ़ी रेखाओं के बीच कुछ बारीक रेखाएँ दिखाई देती है। प्रत्येक दो बारिक रेखाओं के बीच की दूरी 1 मिमी होती है। प्रत्येक छोटे वर्ग का क्षेत्रफल 1 (मिमी)" होता है। प्रत्येक दो मोटी रेखाओं के बीच की दूरी 1 सेमी. होती है। मोटी रेखाओं द्वारा घेरे गये बड़े वर्ग का क्षेत्रफल 1 (सेमी)' होता है। यहाँ हम ग्राफ पेपर के द्वारा वर्ग सेमों के खानों का उपयोग करके कुछ अनियमित आकृतियों का क्षेत्रफल निकालना सीखेंगे।
पीपल के पत्ते का क्षेत्रफल ज्ञात करना
पीपल के पत्ते को लेकर, उसे ग्राफ पेपर के ऊपर रखकर उसकी सीमा पेन्सिल अंकित कीजिए। पत्ते को हटाइए। अब इस सीमा के अन्दर के पूर्ण वर्ग, आधे से अधिक एवं आधे वर्गों को सावधानी से गिनिए। जिन वर्गों के आधे से भी कम भाग से सीमा रेखा गई है ऐसे वर्गों को छोड़ दें। पत्ते का क्षेत्रफल सेमी. क्षेत्रफल के वर्गों की संख्या) + = (प्रत्येक 1 (प्रत्येक आधे वर्ग से अधिक लेकिन एक वर्ग सेमी. से कम क्षेत्रफल वाले वर्गों की संख्या) + 1/2 (प्रत्येक 1/2 सेमी. क्षेत्रफल के वर्गों की संख्या)। 2 इस विधि से हमें पत्ते का सही क्षेत्रफल ज्ञात नहीं होता है।
क्योंकि इसमें उन वर्गों को छोड़ दिया गया है जिनका क्षेत्रफल 1/2 सेमी. से कम था। लेकिन उनकी अंशतः पूर्ति के लिये उन वर्गों को गिन लिया गया है जिनका क्षेत्रफल 1/2 (सेमी.) से अधिक है।
उपरोक्त विधि के अनुसार प्राप्त प्रेक्षणों को निम्न तालिक में उचित स्थान पर लिखते हैं।
क्र. विवरण
1. पते की आकृति के अन्दर प्रत्येक एक वर्ग सेमी. क्षेत्रफल के वर्गों की संख्या – खानों की संख्या – 37 क्षेत्रफल (सेमी.)2 – 37
2. पत्ते को आकृति के अन्दर प्रत्येक 1/2 वर्ग सेमी. से अधिक परन्तु 1 सेमी.2 से कम क्षेत्रफल के वर्गों की संख्या – खानों की संख्या – 15 क्षेत्रफल (सेमी.)2 – 15
3. पत्ते की आकृति के अन्दर प्रत्येक 1/2 वर्ग सेमी. क्षेत्रफल के वर्गों की संख्या – खानों की संख्या – 02 क्षेत्रफल (सेमी.)2 – 01
4. आकृति के अन्दर प्रत्येक 1/2 वर्ग सेमी. से कम क्षेत्रफल के वर्गों की संख्या 12 हैं उन्हें छोड़ देते है। – खानों की संख्या – 12 – क्षेत्रफल (सेमी.)2 – 00
कुल निकटतम क्षेत्रफल – 53 सेमी2
1 वर्ग का क्षेत्रफल = 1 सेमी 2
अतः पते का क्षेत्रफल 53 वर्ग सेमी. (लगभग) है।
उपरोक्त विधि अनुसार आप ऐसे ही अनियमित आकार की वस्तुओं (पत्तों, कागज के टुकड़ों आदि) का क्षेत्रफल कर सकते हैं।
आयतन मापन
हम दैनिक जीवन में अनेक वस्तुओं को अपने आस-पास देखते हैं। हम अपने अनुभव के आधार पर यह कह सकते हैं कि माचिस की तुलना में ईंट अधिक स्थान घेरती है, क्रिकेट बॉल की तुलना में फुटबॉल अधिक स्थान घेरती है। वास्तव में किसी वस्तु द्वारा घेरे गये स्थान को उस वस्तु का आयतन कहते है। आयतन का S.I. मात्रक घनमीटर है। जिसे (मीटर)' लिखकर व्यक्त किया जाता है। 1 घन मीटर उस घन के आयतन के बराबर होता है जिसकी प्रत्येक भुजा की लम्बाई । मीटर हो। व्यवहारिक जीवन में हमें इससे बड़े एवं छोटे मात्रकों की आवश्यकता भ होती है। नीचे दी गई तालिका में कुछ आयतनों के मात्रक दिये गये हैं।
1 (मीटर)3 = 1000 (डेसी मीटर)3
1 (डेसी मीटर )3 = 1000 (सेमी) 3
1 (सेमी) = 1000 (मिमी)3
1 लीटर = 1000 मिली लीटर
नियमित ठोसों का आयतन
हम अपने आस-पास कई वस्तुओं को देखते हैं। जैसे घन, घनाभ, बेलन, गोला आदि। यह सभी नियमित ठोसों के उदाहरण है। नियमित ठोसों के आयतन, उनकी लम्बाई, चौड़ाई, ऊँचाई अथवा अर्धव्यास मापकर ज्ञात कर सकते हैं।
क्र. – नाम – आयतन के लिए सूत्र
1. – घन – आयतन = भुजा × भुजा × भुजा = (भुजा)3 = a3
2. – घनाभ – आयतन = लम्बाई × चौड़ाई × ऊँचाई = axbxc
3. – बेलन – आयतन = π x (अर्धव्यास)2 × ऊँचाई (h) =πr2 × h
4. – गोला – आयतन = π × (अर्धव्यास)3 = 4/3 π r3
5. – शंक – आयतन = π × (अर्धव्यास)2 x ऊँचाई = 1/3πr2h
द्रवों का आयतन ज्ञात करना
आपने अपने आस-पास देखा होगा कि मिट्टी का तेल एवं दूध आदि का मापन एक विशेष पात्र द्वारा किया जाता है। जिसके द्वारा हम 1 लीटर, 1/2 लीटर, 1/4 लीटर (पाव लीटर) आदि माप सकते है। यह सभी विशेष पात्र द्रवों के आयतन के मापन में प्रयुक्त किये जाते हैं। इनमें से कुछ पात्रों के चित्र दिये गये है। इनकी धारिता निश्चित होती है, अत: इनके द्वारा द्रव का आयतन मापा जा सकता है।
अनियमित ठोस (अघुलनशील) का आयतन ज्ञात करना :
ऐसी ठोस वस्तुएँ जिनका आकार नियमित नहीं होता है। (जैसे पत्थर का टुकड़ा आदि) अनियमित आकार की वस्तुएँ कहलाती हैं। इस प्रकार की वस्तुओं का आयतन ज्ञात करने के लिये कोई निश्चित सूत्र नहीं होता है। इनका आयतन कुछ अन्य विधियों से ज्ञात किया जा सकता है। आइए, मापक बेलन की सहायता से पत्थर के टुकड़े का आयतन ज्ञात करें ।
द्रव्यमान मापन के उपकरण
साधारण तौर पर वस्तुओं का द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए निम्न उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
1. अल्प द्रव्यमान को शुद्धता पूर्वक मापन हेतु विशेष प्रकार की तुलाएँ काम में लाते है इन्हें भौतिक तुला कहते है। आजकल ऐसी तुलाओं द्वारा मिलीग्राम के दसवें भाग तक शुद्धता पूर्वक माप कर सकते हैं। साधारण तुलाओं से माप करते समय एक पलड़े पर वह वस्तु रखते है जिसकी तौल करनी होती है, तथा दूसरे पलड़े पर तौल के उपयुक्त प्रमाणिक बाँट रखते है, अप्रमाणिक बाँट जैसे पत्थर, वस्तु आदि रखकर नहीं तौलना चाहिए, क्योंकि यह कानूनन अपराध है।
प्रौद्योगिकी के विकास के साथ-साथ ऐसी इलेक्ट्रॉनिक तुलाएँ विकसित की गई है, जो 1 ग्राम के हजारवे भाग को भी शुद्धता पूर्वक माप सकती है।
घनत्व की अवधारणा
दैनिक जीवन में आपने अनुभव किया होगा कि जब समान आकर तथा आयतन का लोहे और लकड़ी का टुकड़ा लेते हैं, तो लोहे का टुकड़ा आपको अधिक भारी लगता है। आपने यह भी अनुभव किया होगा कि जब जल में बर्फ के टुकड़े डालते हैं तो वह जल के ऊपर ही तैरते रहते हैं। ऐसा क्यों होता है ? इसको समझने के लिये एक क्रियाकलाप करते हैं।
कारण
वास्तव में किसी वस्तु का द्रव्यमान उसमें उपस्थित पदार्थ की मात्रा की माप है। उपरोक्त लिये गये तीनों द्रवों में से ग्लिसरीन में पदार्थ की सबसे अधिक मात्रा उपस्थित है तथा मिट्टी के तेल में सबसे कम पदार्थ की मात्रा उपस्थित है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि-
(1) ग्लिसरीन में पदार्थ पानी से अधिक गाढ़ा(सघन) है।
(2) पानी में पदार्थ केरोसीन की तुलना में अधिक सघन है।
(3) तीनों लिये गये द्रवों में से ग्लिसरीन का द्रव्यमान अधिकतम और केरोसीन (मिट्टी का तेल) का द्रव्यमान न्यूनतम है, अत: हम कह सकते है कि समान आयतन की वस्तुओं में से जिस वस्तु का द्रव्यमान अधिक होता है उसमें पदार्थ की सघनता भी अधिक होती है और यह सघनता ही घनत्व को प्रदर्शित करती है। उपरोक्त तीनों द्रवों में से ग्लिसरीन का घनत्व अधिकतम तथा केरोसीन का न्यूनतम है।
"किसी पदार्थ के इकाई आयतन के द्रव्यमान को उस पदार्थ का घनत्व कहते है । "
घनत्व = द्रव्यमान / आयतन
इस सूत्र के आधार पर दो निष्कर्ष निकलते हैं:
(1) दो वस्तुओं का आयतन समान है तो अधिक द्रव्यमान वाली वस्तु का घनत्व अधिक होगा।
(2) यदि दो वस्तुओं के द्रव्यमान समान हैं तो जिस वस्तु का आयतन अधिक होगा उसका घनत्व कम होगा।
S.I. पद्धति में घनत्व का मात्रक किलोग्राम / घनमीटर है।
आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
B B Patle
edubirbal.com
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