भोपाल गैस दुर्घटना | Bhopal gas accident

यह औद्योगिक विनाशकारी दुर्घटना भोपाल नगर के मध्य स्थित यूनियन कार्बाइड नामक अमेरिकी कीटनाशक कम्पनी में 3 दिसम्बर 1984 को भोर में हुआ था।

भोपाल गैस दुर्घटना | Bhopal gas accident

भोपाल गैस दुर्घटना

भारत के मध्य प्रदेश राज्य के भोपाल शहर में गैस दुर्घटना हुई। इसे दुनिया का सबसे भयानक औद्योगिक विनाश कहा जाता है। यह औद्योगिक विनाशकारी दुर्घटना भोपाल नगर के मध्य स्थित यूनियन कार्बाइड नामक अमेरिकी कीटनाशक कम्पनी में 3 दिसम्बर 1984 को भोर में हुआ था। इस कारखाने से एकाएक 40 टन अत्यन्त विषैली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट, जिसे MIC भी कहा जाता है, के निकलने से करीब ढाई-तीन हजार लोगों और कई पशुओं की जानें चली गयी थीं। इस दुर्घटना ने कई कारणों को उजागर किया, जैसे उपयुक्त सुरक्षा उपायों और उपकरणों का न होना, कर्मचारियों के लिये पर्याप्त प्रशिक्षण न होना और दुर्घटना के संबंध में शुरू में ही दी गयी। चेतावनियों की उपेक्षा 1999 में भारत के एक लोक अभियोजन के दौरान यह बात उभर कर आयी कि अमेरिका में यूनियन कार्बाइड के कारखानों के विपरीत भारत में उसके सहायक कारखाने ऐसी समस्याओं से निपटने के लिये तैयार नहीं थे।

इस प्रकार की दुर्घटनाओं का सामना करने के लिये कोई कार्य योजना नहीं बनायी गयी थी। भोपाल में निर्मित किये जा रहे और उपयोग में लाये जा रहे रसायनों की तादाद और उनके खतरों के बारे में स्थानीय प्राधिकारियों को जानकारी नहीं दी गयी थी। इस विनाश ने पर्यावरण की सुरक्षा से लेकर प्रदूषण के गहन मामलों के खिलाफ कार्यवाही और प्रभावित लोगों के लिये मुआवजा तथा पुनर्वास तक के मुद्दे सामने आये। भारतीय संसद ने भोपाल गैस दुर्घटना से संबंधित एक विशेष अधिनियम मार्च 1985 में पारित किया। और यूनियन कार्बाइड के खिलाफ मामले में दुर्घटना के शिकार लोगों के कानूनी प्रतिनिधि के रूप में काम करने के लिये भारत सरकार को अधिकृत किया। मध्यप्रदेश सरकार ने राहत और पुनर्वास के काम की देखभाल करने के लिये भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग स्थापित किया। विनाश से प्रभावित लोगों द्वारा न्याय पाने के लिये किया जा रहा संघर्ष अभी चल रहा है। क्योंकि खतरनाक कचरे के हज़ारों टन के मलबे को साफ करने का मामला अभी तक नहीं निपटा है। इस ज़हरीले मलबे से मिट्टी और पानी प्रदूषित हो रही है। और इससे कई दशकों तक धीरे-धीरे जहर घुलता रहेगा । और इन्सानों की तंत्रिका प्रणाली, लिवर और गुर्दे पर असर डालने वाले रोग होने की संभावना बनी रहेगी।

आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
B B Patle
edubirbal.com

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