भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक और पहचान | Indian National Emblem and Identity

सभी नागरिकों में राष्ट्र के प्रति प्रेम होता है।

भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक और पहचान | Indian National Emblem and Identity

सभी नागरिकों में राष्ट्र के प्रति प्रेम होता है। राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान दर्शाकर राष्ट्रीय गौरव व गरिमा को अपनी पहचान बनाकर इसे व्यक्त किया जाता है। हमारा राष्ट्रध्वज, राष्ट्रीय चिन्ह, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राष्ट्रीय पक्षी, राष्ट्रीय पशु व राष्ट्रीय पुष्प हमारी राष्ट्रीय एकता व स्वतंत्रता के प्रतीक हैं। राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।

राष्ट्रध्वज

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में समान अनुपात में तीन आड़ी पट्टियाँ हैं। इनमें सबसे ऊपर की पट्टी में गहरा केसरिया रंग, बीच की पट्टी में सफेद तथा नीचे वाली पट्टी में हरा रंग होता है। ध्वज की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3-2 है। सफेद पट्टी के बीच में नीले रंग का एक चक्र है। इस चक्र में 24 तीलियां हैं। इसका प्रारूप सारनाथ में स्थित अशोक स्तंभ पर बने चक्र से लिया गया है।

ध्वज में स्थापित तीन रंग

(1) केसरिया त्याग, शौर्य व बलिदान का प्रतीक है। यह रंग स्वतंत्रता संघर्ष में अपना जीवन न्यौछावर करने वालों के बलिदान और देश भक्ति की निरंतर याद दिलाता है।
(2) ध्वज की श्वेत पट्टी सत्य व शांति का प्रतीक है। यह रंग हमें सच्चा, शुद्ध व सरल बनने के लिये प्रेरित करता है।
(3) गहरे हरे रंग की पट्टी जीवन, उत्पादकता और खुशहाली को दर्शाती है। हरा रंग विश्वास व दृढ़ता का भी प्रतीक है।
राष्ट्रध्वज में श्वेत पट्टी के मध्य गहरे नीले रंग से अंकित चक्र का ऐतिहासिक महत्व है। सारनाथ में सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया एक स्तंभ है। जिसे इस स्थान पर भगवान बुद्ध द्वारा दिये गये प्रथम उपदेश की स्मृति में बनवाया गया था। अशोक के स्तंभ में यह चक्र धर्म का प्रतीक है। चक्र गति, प्रगति और उत्साह को इंगित करता है। यह हमें धर्म एवं सच्चाई के रास्ते पर चलने और देश को उन्नति और समृद्धि की ओर ले जाने के लिए भी प्रेरित करता है। जब भी राष्ट्रध्वज फहराया जाए, इसे आदर मिलना चाहिए। भारतीय लोगों द्वारा राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय खेलों में राष्ट्रध्वज का प्रदर्शन करना अपनी देशभक्ति और देश प्रेम की भावना को दर्शाता है।
राष्ट्रध्वज का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक के मूल कर्तव्यों में से एक है।

राष्ट्रध्वज फहराने के नियमों को जानें

1. जब राष्ट्रध्वज फहराया जाता है, तब हमें इसके सम्मान में सावधान की मुद्रा में खड़े रहना चाहिए।
2. ध्वज की केसरिया रंग की पट्टी सदैव ऊपर की ओर रहना चाहिए।
3. प्रतिदिन महत्वपूर्ण सरकारी भवनों पर राष्ट्रध्वज फहराना चाहिए तथा सूर्यास्त से पूर्व उतार लेना चाहिए।
4. अब हम राष्ट्रीय पर्व पर हमारे घरों पर भी राष्ट्रीय ध्वज फहराए सकते हैं।
5. राष्ट्रीय ध्वज का प्रयोग सजावट के लिए नहीं करना चाहिए।
भारत की संविधान सभा में राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया है।

राष्ट्रीय चिन्ह

यह चिन्ह सारनाथ के अशोक स्तंभ से लिया गया है। इस चिन्ह में हमें तीन शेर दिखाई देते हैं, वास्तव में ये संख्या में चार है। चौथा शर पीछे की ओर जुड़ा होने के कारण हमे केवल तीन ही दिखते है। शेरों के नीचे की चौकी में बाई ओर एक घोड़ा, दाई ओर एक बैल और बीच में एक चक्र दिखाई देता है। नीचे देवनागरी लिपि में \'सत्यमेव जयते\' शब्द लिखा है। इसका अर्थ है केवल सत्य की ही विजय होती है। चक्र धर्म, शेर साहस, ऐश्वर्य व शक्ति, घोड़ा ऊर्जा और वेग, बैल मेहनत और दृढ़ता का प्रतीक है। देश के प्रत्येक नागरिक को उपरोक्त गुणों को अपने व्यवहार और चरित्र में दर्शाने का संकल्प करना चाहिए। राष्ट्रीय चिन्ह भारत सरकार की मोहर (मुद्रा) है। हम इस चिन्ह को नोटों, सिक्कों, सरकारी आदेशों, विज्ञप्तियों आदि पर अंकित देखते हैं।

राष्ट्रगान

हमारे राष्ट्रगान के रचयिता गुरुदेव रविन्द्रनाथ ठाकुर हैं। इस गान में हमारी मातृभूमि के प्रति श्रद्धा को भावना प्रकट की गई है। राष्ट्रीय पर्वो पर राष्ट्रध्वज फहराने के बाद राष्ट्रगान गाया जाता है। राष्ट्रगान हमारे मन में राष्ट्रीय एकता की भावना जागृत करता है।

राष्ट्रगान

जनगणमन अधिनायक जय हे,
भारत-भाग्य-विधाता!
पंजाब, सिधु, गुजरात, मराठा,
द्राविड़, उत्कल, बंग,
विन्ध्य हिमाचल यमुना, गंगा,
उच्छल जलधि तरंग!
तव शुभ नामे जागे,
तव शुभ आशिष माँगे,
गाहे तव जय गाथा
जनगण-मंगलदायक, जय हे,
भारत-भाग्य-विधाता।
जय हे जय हे जय हे!
जय जय जय, जय है!

राष्ट्रगान हमारी मातृभूमि की प्रशंसा का गीत है। यह हमें सहनशीलता व राष्ट्रीय एकता का संदेश देता है। इसके गायन अथवा धुन बजने के समय-
1. हमें सावधान की मुद्रा में खड़े रहना चाहिए।
2. गाते समय चलना अथवा बातें नहीं करना चाहिए।
3. समूह में गाते समय एक स्वर व जोश से गाना चाहिए।
4. राष्ट्रगान के गायन की अवधि लगभग 52 सेकेण्ड है।

राष्ट्रीय गीत

इस गीत की रचना बंकिमचन्द चट्टोपाध्याय ने की है। इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के समय देश के नौजवानों में राष्ट्रभक्ति की भावना प्रज्वलित की थी। अतः इसे भी राष्ट्रगान के समान सम्मान दिया गया है, तथा इसे \'जनगणमन...के समान मान्यता प्राप्त है।
वन्दे मातरम् राष्ट्रीय गीत इस प्रकार है।
वन्दे मातरम्।
सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम्
शस्यश्यामलाम् मातरम्॥ वन्दे ॥
शुभ ज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,
फुल्ल कुसुमित-द्रुमदल-शोभिनीम्,
सुहासिनीम्, सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम् मातरम्॥ वन्दे॥

राष्ट्रीय पुष्प

कमल, भारत का राष्ट्रीय पुष्प है। कमल कीचड़ में खिलता है, पर यह उससे ऊपर रहता है। यह इस बात का प्रतीक है कि बुराई के बीच रहकर भी अच्छा बना जा सकता है। प्राचीनकाल से कमल को भारतीय संस्कृति का प्रतीक माना गया है।

राष्ट्रीय पक्षी

सुन्दर, आकर्षक मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। इस पक्षी का भारतीय कथाओं, साहित्य और लोक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। मोर का नृत्य (विशेषकर वर्षाऋतु में) देखने योग्य होता है। भारतीय वन्य प्राणी सुरक्षा अधिनियम 1972 के अंतर्गत इसे पूर्ण संरक्षण प्राप्त है। मोर को मारना दण्डनीय अपराध है।

राष्ट्रीय पशु

शक्ति और शान का प्रतीक बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है। बाघ अपनी दृढ़ता, स्फूर्ति और अपार शक्ति के लिए जाना जाता है। देश में बाघों की घटती हुई संख्या को देखते हुए इनके संरक्षण के लिए अप्रैल 1973 में बाघ परियोजना प्रारंभ की गई। इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 27 बाघ अभ्यारण्य स्थापित किये गये है। बाघों का शिकार या उन्हें मारना दंडनीय अपराध है।

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