तराइन का द्वितीय युद्ध 1192
तराइन के प्रथम युद्ध में पराजित होने के बाद गौरी गजनी लौट गया। इस पराजय से वह इतना दुखी था। कि उसने खाना पीना छोड़ दिया। 1 वर्ष की तैयारी के बाद वह विशाल सेना के साथ भारत की ओर कुच किया। 1192 मे तराइन पहुंचा और उसी स्थान पर अपना शिविर लगाया। जहां 1 वर्ष पूर्व उसकी पराजय हुआ था।
उसकी सेना में गजनवी के चार प्रसिद्ध सेनानी जो अनुभवी व दक्ष थे।
1. खाररबक
2. खर्मेल
3. इलाह
4. मुकलवा
उधर पृथ्वीराज की सेना की कमान गोविंद राय खांडे राय व बदमाश रावण के हाथों में थी। युद्ध से पहले गौरी ने पृथ्वीराज को अपनी अधीनता स्वीकार करने के लिए संदेश भेजा। किंतु उसने कटु उत्तर के साथ प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। 1192 ईस्वी में एक बड़ी सेना के साथ पृथ्वीराज चौहान ने गौरी का सामना किया। किंतु वहां गौरी के साथ बतावा युद्ध प्रणाली के सामने नहीं टिक सका और पराजित हुआ। गोविंद राय जो कि युद्ध में पृथ्वीराज तृतीय के अंतिम दल का नेतृत्व कर रहा था। वह मारा गया। खाण्डेराय भी जिसने 1191 बेमेतरा इनके पहले युद्ध में मोहम्मद गोरी को घायल किया था। वहाँ भी मारा गया पृथ्वीराज हताश होकर घोड़े पर बैठकर भागने का प्रयास किया।
किन्तु वह सूरसयी आधुनिक सिरसा (हरियाणा राज्य) के निकट पकड़ा गया। और बंदी बना लिया गया। पृथ्वीराज की मृत्यु के बारे में विद्वानों ने विभिन्न मत प्रकट किया है। किंतु इनमें सर्वश्रेष्ठ मत हसन निजामी का माना जाता है। कि पृथ्वीराज गौरी के साथ अजमेर गया और उसने गौरी की अधिनता स्वीकार कर ली परंतु जब उसने विद्रोह करने का षड्यंत्र किया। तो उसे मृत्यु दंड दे दिया गया।
चन्दावर का युद्ध 1194 (कन्नौज का युद्ध) –
दोआब में अपने पैर जमाने के लिए गौरी ने पहले कन्नौज की शक्तिशाली घर वालों राज्य को हराना जरूरी समझा। गौरी ने कन्नौज की महानता को महसूस किया।
50,000 अश्वारोहियो के साथ वह कन्नौज व बनारस की ओर कूच किया। उस समय कन्नौज में इटावा के बीच चंदावर नामक स्थान पर दोनों के मध्य युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान जयचंद की आंख में तीर लग गया। वह हाथी से गिर गया उसकी सेना का साहस टूट गया और वह रणभूमि से भाग गया। जयचंद पराजित हुआ और मारा गया। इसके बाद गौरी ने अश्वनी के किले को लूटा। जहां जयचंद ने धन संग्रहित कर रखा था। जयचंद के सभी प्रमुख स्थानों पर अधिकार कर लिया। आगे बढ़ कर उसने बनारस को भी लूटा बनारस में कई मंदिरों को नष्ट कर उनके स्थान पर मस्जिद बनवाई।
आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
B B Patle
edubirbal.com
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