भारतीय कांग्रेस ने अंग्रेजों के विरुद्ध भारत छोड़ो आन्दोलन का प्रस्ताव 7-8 अगस्त 1942 को पारित किया। 9 अगस्त 1942 ई. को पं. जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल , मौलाना अबुल कलाम आजाद, महात्मा गाँधी तथा जे.बी. कृपलानी जैसे कांग्रेस कार्यसमिति के कई नेताओं को गिरफ्तार कर अज्ञात स्थानों पर भेज दिया गया।
जबलपुर में 9 अगस्त 1942 को स्थानीय नेताओं ने बैठक करके एक सप्ताह तक पूर्ण हड़ताल करने का निर्णय लिया। अंग्रेज अधिकारियों ने स्थिति से निपटने के लिए नगर में धारा 144 लगाकर जनसभाओं को प्रतिबन्धित कर दिया। इससे जनमानस में उत्तेजना फैल गई। प्रतिक्रियास्वरूप आंदोलनकारियों ने जगह-जगह टेलीफोन के तार काटे, रेल की पटरियाँ उखाड़ीं, शासकीय इमारतों को क्षतिग्रस्त किया तथा धारा 144 को तोड़ा, विशाल जुलूस निकाले तथा जनसभाएँ आयोजित कीं। पुलिस द्वारा दमनात्मक कार्यवाहियाँ की गईं। परिणामस्वरूप अनेक लोग गिरफ्तार हुए, घायल हुए तथा शहीद भी हुए। मध्यप्रदेश में 9 अगस्त 1942 को जब महात्मा गाँधी तथा अन्य नेताओं की गिरफ्तारी का समाचार जनमानस को प्राप्त हुआ तो सम्पूर्ण प्रदेश में जगह-जगह पर लोगों में आक्रोश फूट पड़ा।
ग्वालियर रियासत में भी भारत छोड़ो आन्दोलन ने शीघ्र ही उग्र रूप धारण कर लिया। नीमच, शाजापुर, मंदसौर, उज्जैन, मुरैना, भिण्ड आदि क्षेत्रों ने आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस आंदोलन में महात्मा गाँधी के नारे करो या मरो ने बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और पुरुषों को घर की चौखट से बाहर निकाल दिया।
इन्दौर में भी 9 अगस्त 1942 को महात्मा गाँधी तथा अन्य नेताओं की गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही स्थिति अत्यन्त तनावपूर्ण हो गई। राष्ट्रवादी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे, हड़ताल की तथा जुलूस भी निकाले। इन्दौर के वस्त्र उद्योगों के श्रमिक तथा छात्र भी इस आंदोलन में शामिल हो गये। अंग्रेजी शासन ने आंदोलनकारियों के विरुद्ध कठोर तथा दमनकारी कदम उठाये।
भोपाल, बुन्देलखण्ड और रीवा में भी जनमानस ने महात्मा गाँधी के करो या मरो नारे से प्रेरित होकर अंग्रेजी शासन के विरुद्ध आवाज बुलंद की। जगह-जगह टेलीफोन के तार काटे, रेल की पटरियों को उखाड़ा, सरकारी सम्पत्ति को क्षति पहुँचाई, पोस्ट ऑफिसों को जलाया, सरकारी भवनों में तोड़फोड़ की। ब्रिटिश प्रशासन ने आंदोलनकारियों पर दमन चक्र चलाया लेकिन आंदोलनकारियों ने समस्त अत्याचारों को सहन करते हुए आंदोलन को जारी रखा।
इस प्रकार भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में मध्यप्रदेश के देशभक्तों और क्रांतिवीरों न बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इन्हीं क्रांतिवीरों के त्याग और बलिदान से देश आजाद हुआ।
आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
B B Patle
edubirbal.com
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