पदार्थ के विशिष्ट गुण
Special properties of matter
पदार्थ अलग-अलग अवस्थाओं में कुछ विशेष गुण प्रदर्शित करते हैं, जैसे सम्पीड़न, विसरण, बहना आदि।
संपीड़न
compression
जब हम साइकिल की ट्यूब में हवा भरते हैं तो पम्प द्वारा हवा को दबाकर कम स्थान में अधिक हवा भर दी जाती है। वायु के अणुओं के बीच स्थान अधिक होने से दाब पाकर अणुओं के बीच का स्थान कम हो जाता हैं तथा उसका आयतन कम हो जाता है। हवा को दबाकर उसे कम आयतन में सीमित करना गैसों का सम्पीडन कहलाता है। फुटबाल में हवा भरना गैसों को सम्पीडित करने का उदाहरण है।
विसरण
diffusion
घर के बगीचे में खिले फूलों जैसे चमेली, रातरानी, मधुमालिनी, चम्पा आदि की सुगन्ध आसपास के घरों में भी महसूस की जा सकती है। इसी तरह स्याही सोख कागज पर स्याही की एक बूँद गिरते ही वह फैल जाती है। बच्चों फूलों तथा अन्य पदार्थों की सुगंध/ गंध का फैलना विसरण के उदाहरण है, क्योंकि अन्तराणुक बल कम होने के कारण वे सरलता से एक स्थान से दूसरे स्थान पर विसरित हो जाते हैं।
बहना
flow
पानी तथा हवा के बहने से आप भली-भांति परिचित हैं। बहना द्रव एवं गैसों का एक विशेष गुण है, लेकिन सभी द्रव एवं सभी गैसें एक ही गति से नहीं बहती हैं। उनके बहने की गति अलग-अलग होती है। आइए, कुछ द्रव पदार्थों के बहने की गति जानने के लिए एक क्रियाकलाप करें-
पदार्थों का रासायनिक वर्गीकरण
Chemical Classification of Substances
बच्चों प्रकृति के सभी जीवित तथा अजीवित घटक, पदार्थों से मिलकर बने होते है, पदार्थ रासायनिक दृष्टि से तीन प्रकार के होते हैं - तत्व, यौगिक एवं मिश्रण।
तत्व एवं उनके प्रतीक
Elements and their symbols
यह पदार्थ का सरलतम रूप है, जिसे और अधिक सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता। यह पदार्थ का सबसे शुद्ध रूप भी है। एक तत्व में पाए जाने वाले कण (परमाणु) आपस में एक समान होते हैं, जबकि दूसरे तत्व के कणों से भिन्न होते हैं, जैसे- तांबे के कण आपस में एक समान किन्तु लोहे या किसी अन्य तत्व के कणों से भिन्न होंगे।
एक ही प्रकार के कणों (परमाणुओं) से मिलकर बने पदार्थ को तत्व कहते हैं, जैसे लोहा, ताँबा, पारा, मैग्नीशियम, ऑक्सीजन आदि।
मनुष्य प्राचीन काल से ही तांबा, लोहा आदि तत्वों से भली भांति परिचित है एवं उसका उपयोग करता रहा है। प्राचीन काल में सर्वप्रथम कीमियागरों द्वारा सुविधा की दृष्टि से तत्वों को प्रतीकों के रूप में लिखने का प्रयास किया गया। इसके पश्चात् जॉन डॉल्टन ने भी प्रतीकों द्वारा तत्वों को दर्शाने का प्रयास किया, किन्तु कुछ कमियाँ होने के कारण वे प्रतीक भी अधिक उपयोगी सिद्ध नहीं हुए। स्वीडन के वैज्ञानिक जे. जे. वर्जीलियस ने सर्वमान्य और सरलतम पद्धति बताई जो आज भी उपयोग में लाई जाती है।
1. इस पद्धति में तत्वों के संकेत सामान्यतः उनके अंग्रेजी नामों के आधार पर दिए गए हैं।
2. कुछ तत्वों के नाम उनके लैटिन नामों के आधार पर भी दिए गए हैं।
3. तत्वों के प्रतीक का पहला अक्षर अंग्रेजी की बड़ी वर्णमाला का बड़ा अक्षर (Capital) लिखा जाता है। जैसे हाइड्रोजन का प्रतीक H है।
4. प्रतीकों में समानता न हो इसको ध्यान में रखते हुए कुछ तत्वों के प्रतीक अंग्रेजी नाम के दो वर्ण लिए जाते हैं, पहला वर्ण बड़ा अक्षर (Capital) और दूसरा वर्ण छोटा अक्षर (Small) लिखा जाता है। जैसे कार्बन और क्लोरीन ये दोनों तत्व अंग्रेजी के 'C' वर्ण से शुरू हुए हैं। इसलिए कार्बन का प्रतीक 'C' और क्लोरीन का 'CI'रखा गया है।
कुछ तत्वों के प्रतीक जानें
तत्व का नाम – प्रतीक
element name – symbol
हाइड्रोजन – H
ऑक्सीजन – O
कार्बन – C
नाइट्रोजन – N
आयोडीन – I
सल्फर (गंधक) – S
फास्फोरस – P
बोरॉन – B
कैल्शियम – Ca
क्लोरीन – Cl
निकिल – Ni
एल्यूमीनियम – Al
बेरियम – Ba
ब्रोमीन – Br
कोबॉल्ट – Co
लोहा – Fe
पोटेशियम – K
सोडियम – Na
ताँबा – Cu
पारा – Hg
उपरोक्त तालिका में हाइड्रोजन (H) से कोबाल्ट (Co) प्रतीक अंग्रेजी नामों के आधार पर लिखे गए हैं। जबकि लोहे (Fe) से पारे (Hg) तक के प्रतीक उनके लेटिन नामों के आधार पर लिखे गए हैं।
यौगिक :
Compound :
जब दो या दो से अधिक प्रकार के परमाणुओं की आपस में क्रिया होती है तो क्रिया के पश्चात् नया पदार्थ के बनता है। इस बने नये पदार्थ में पुराने तत्वों के गुण नहीं होते हैं। इस नये पदार्थ को यौगिक कहते हैं। यौगिक में तत्व एक निश्चित अनुपात में संयोग करते हैं।
उदाहरण:
Example:
हम एक पोर्सलीन की प्याली में लोहे की छीलन और सल्फर लें। इसे तब तक गर्म करते रहें जब तक कि वह दीप्त न हो जाये। आप देखेंगे कि गर्म करने के पश्चात एक नया पदार्थ 'आयरन सल्फाइड' बन जाता है। आयरन सल्फाइड . के गुण लोहे एवं सल्फर के गुणों से भिन्न होते हैं। यदि हम लोहे की छीलन के पास चुम्बक लाएँ तो छीलन चुम्बक में चिपक जाती है। अब लोहे और सल्फर से बने आयरन सल्फाइड के पास चुम्बक लाए तो आयरन सल्फाइड के कण चुम्बक में नहीं चिपकते हैं। क्योंकि यह एक यौगिक है। यौगिक शब्द योग से बना है। योग का या मिलाना।
दो या दो से अधिक प्रकार के परमाणुओं के निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोग करने पर बने नये पदार्थ 'यौगिक' कहलाते हैं। जैसे- जल, नमक आदि।
हाइड्रोजन गैस एवं ऑक्सीजन गैस के संयोग से बना जल (द्रव) यौगिक है। हाइड्रोजन गैस स्वयं जलती है तथा ऑक्सीजन गैस जलने में सहायता करती है। जबकि जल का उपयोग आग बुझाने में किया जाता है अर्थात जल में ज्वलनशीलता का गुण नहीं पाया जाता। हम अपने दैनिक जीवन में अनेक यौगिकों का उपयोग करते हैं। दैनिक जीवन में उपयोग में आने वाले कुछ यौगिक निम्नलिखित है-
क्र. – यौगिक का नाम – सूत्र
No. – Compound Name – Formula
1. – जल – H2O
2. – सोडियम क्लोराइड (नमक) – NaCl
3. – सोडियम कार्बोनेट (कपड़े धोने का सोडा) – Na2CO
4. – सोडियम बाईकार्बोनेट (खाने का सोडा) – NaHCO3
5. – कैल्शियम ऑक्साइड (बिना बुझा चूना) – CaO
6. – कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (बुझा हुआ चूना)– Ca(OH)2
मिश्रण–
mix–
आपने मकान बनते देखा होगा। जानते हो सीमेन्ट का घोल तथा पुताई के लिए चूने का घोल कैसे बनाते हैं ? सीमेन्ट का घोल, सीमेन्ट रेत व जल से मिलाकर तथा चूने का घोल, चूने को जल में घोलकर बनाते है। क्या आप जानते है ? यह दोनों ही घोल किस श्रेणी में जाते हैं ? मिश्रण कहते है, क्योंकि दोनों में उपस्थित अवयवों की मात्रा निश्चित नहीं होती। आवश्यकतानुसार परिवर्तित करते रहते हैं।
दो या दो से अधिक पदार्थ अनिश्चित अनुपात में मिलकर मिश्रण बनाते हैं जैसे वायु, समुद्री जल, सोडा वाटर।
1. मिश्रण को अंग्रेजी में Mixture कहते है। Mix अर्थात् मिलाना।
2. पानी में नमक मिलाएँ तो नमकीन घोल बनेगा और शक्कर डालें तो मीठा घोल मिलेगा।
3. मिश्रण में अवयवी पदार्थों के गुण उपस्थित होते हैं। भूसा कंकड़ मिला गेहूँ भी मिश्रण का उदाहरण है। पानी में तेल मिला दें तो यह भी मिश्रण है। हवा में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाईऑक्साइड और अन्य गैसे हैं। अतः वायु भी मिश्रण है।
सारणी : विभिन्न प्रकार के मिश्रण
क्रमांक – मिश्रण के प्रकार – उदाहरण
1. गैस-गैस मिश्रण – वायु
2. द्रव में गैस – सोडा वाटर या मृदु पेय (कार्बन डाइऑक्साइड का जल में विलयन जल में घुली ऑक्सीजन)
3. द्रव में द्रव – नींबू का रस एवं जल, जल तथा सिरका
4. द्रव में ठोस – शक्कर का विलयन; नमक का विलयन
तथा समुद्री जल
5. ठोस में ठोस – मृदा, मिश्र धातुएँ (पीतल, काँसा)
6. गैस में ठोस – धुआँ
आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
B B Patle
edubirbal.com
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