मौसम बदलने के साथ-साथ कभी हम बहुत गर्मी और कभी बहुत ठंड का अनुभव करते हैं। ऐसा प्रायः वायु के गर्म या ठंडा होने के कारण होता है। वायु में उपस्थित गर्मी ही ताप कहलाती है। ताप को ऊष्मा भी कहा जाता है। वायुमण्डल में ताप कितना बढ़ा या घटा इसका पता उसके मापन से लगाया जाता है। इस प्रकार वायुमण्डल में उपस्थित ताप की मात्रा के मान या मापन को तापमान कहा जाता है। तापमान को सेन्टीग्रेड या सेल्सियस में मापा जाता है।
महत्व
importance
जब हम किसी स्थान के मौसम और जलवायु की बात करते हैं तो इसका तात्पर्य है उनके प्रमुख तत्वों जैसे तापमान, वायुदाब, पवन, आर्द्रता, बादल और वर्षा के बारे में चर्चा करना। लेकिन इनमें तापमान ही सबसे महत्वपूर्ण तत्व है क्योंकि इससे ही अन्य सभी तत्व प्रभावित होकर क्रियाशील होते हैं।
वायुमण्डल ताप कैसे प्राप्त करता है ?
पृथ्वी और इसके वायुमण्डल में ताप की प्राप्ति सूर्य से होती है। सूर्य, ताप और प्रकाश का अक्षय भण्डार है। वह निरन्तर आकाश में चारों ओर ताप और प्रकाश करता है। सूर्य एक विशाल धधकता हुआ आग का गोला है। सूर्य द्वारा ताप के सतत् विसर्जन को सौर विकिरण कहा जाता है।
सूर्य की किरणे पृथ्वी पर आने से पहले वायुमण्डल से होकर गुजरती है। इससे वायुमण्डल का ऊपरी भाग कुछ गरम हो जाता है। किरणें जब पृथ्वी के धरातल पर पहुँचती है तो धरातल अधिक गर्म हो जाता है क्योंकि धरातल वायुमण्डल की अपेक्षा अधिक ताप प्राप्त करता है। पृथ्वी का धरातल इस ताप को धीरे-धीरे पुनः बाहर निकालता है। इस क्रिया को 'पार्थिव विकिरण' कहते हैं। धरातल से निकला हुआ ताप वायुमण्डल को गर्म करता है, जिससे वायु का तापमान बढ़ जाता है। यह गर्म वायु हल्की होकर ऊपर उठती हुई ऊपरी भाग को भी गर्म करती जाती है। किन्तु जैसे-जैसे वायु ऊपर जाती है उसके तापमान में कमी होती जाती है।
वायु का गर्म होना
air heating
वायु तीन क्रियाओं द्वारा गर्म होती है।
1. सबसे पहले सूर्य ताप की 'विकिरण क्रिया' द्वारा धरातल का ऊपरी भाग गर्म होता है।
2. गर्म धरातल के सम्पर्क में आने पर 'संचलन क्रिया' द्वारा वायु की निचली परतें गर्म होती है।
3. वायु की निचली परतें गर्म और हल्की होकर ऊपर उठती है। वायु के इस रिक्त हुए स्थान की पूर्ति के लिए ठंडी वायु ऊपर से नीचे आती है और पुनः गर्म होकर ऊपर उठती है इस सम्पूर्ण क्रिया को 'संवहन क्रिया' कहते हैं।
तापमापी यंत्र द्वारा ताप का मापन
Measurement of temperature by thermometer
तापमान को ज्ञात करने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले यंत्र को तापमापी यंत्र या थर्मामीटर कहते हैं। ताप मापन की इकाई सेन्टीग्रेड और फेरेनहाइट है जिसमें ताप अंशों या डिग्री में प्रकट किया जाता है। आजकल सेंटीग्रेड के बदले सेल्सियस का प्रयोग किया जाता है।
सेंटीग्रेड थर्मामीटर
Centigrade Thermometer
सेंटीग्रेड थर्मामीटर का आविष्कार सेल्सियस नामक वैज्ञानिक ने किया था। अतः उसके नाम पर सेंटीग्रेड के बजाय अब सेल्सियस का प्रयोग किया जाने लगा है। इसमें जल के हिमांक के लिए शून्य (0) अंश और क्वथनांक के लिए 100° सेल्सियस लिखा जाता है।
तापमान की दो स्थितियाँ होती है- अधिकतम और निम्नतम। अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का अन्तर तापान्तर कहलाता है। औसत तापमान ज्ञात करने के लिए अधिकतम और निम्नतम को जोड़कर दो का भाग दिया जाता है।
तापमान को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक
Main factors affecting temperature
तापमान को निम्न कारक प्रभावित करते हैं।
1. सूर्य की किरणों का झुकाव
1. The inclination of the sun's rays
पृथ्वी की तरह उसके आस-पास फैला वायुमण्डल भी गोल है। सूर्य से आने वाली किरणें प्रायः समानान्तर होती हैं किन्तु पृथ्वी की गोलाई के कारण उसके विभिन्न भागों में अलग-अलग कोण से पहुँचती हुई प्रभाव डालती है। विषुवत् वृत्त (भूमध्य रेखा) पर सीधी और ध्रुवों पर तिरछी किरणें पड़ती हैं। लम्बवत् किरणें तिरछी किरणों की अपेक्षा कम क्षेत्रों पर फैलती है इसलिए इनके द्वारा कम क्षेत्र में अधिक ताप मिलता है। तिरछी किरणे अधिक क्षेत्र में फैलती है जिससे ताप का प्रभाव फैलकर कम हो जाता है।
2. वायुमण्डल में किरणों द्वारा तय की गई दूरी
2. Distance covered by rays in the atmosphere
लम्बवत् किरणों को वायुमण्डल में कम दूरी और तिरछी किरणों को अधिक दूरी तय करना पड़ती है। सूर्य की किरणें वायुमण्डल में जितनी अधिक दूरी तय करेगी उनका बिखराव, परावर्तन और अवशोषण उतना ही अधिक होगा, जिससे ताप की तीव्रता में कमी आ जाएगी। वायुमण्डल में भूमध्य रेखा पर कम दूरी और ध्रुवों पर अधिक दूरी पार करना पड़ती है। कम दूरी में ताप का क्षय कम और अधिक दूरी में अधिक होता है।
3. समुद्र से ऊँचाई
3. Height above sea
हम जैसे-जैसे समुद्र तल से ऊँचाई की ओर बढ़ते हैं, तापमान में कमी आती जाती है। एक ही अक्षांश पर स्थित मैदानों की अपेक्षा पर्वतीय भाग अधिक ठंडे रहते हैं। सामान्यतः धरातल से प्रति 165 मीटर की ऊँचाई पर 1 सेल्सियस ताप कम होता जाता है।
4. दिन की अवधि
4. Day duration
पृथ्वी की सतह पर मिलने वाली सूर्य की गर्मी की मात्रा का दिन की अवधि से सीधा सम्बन्ध है। दिन की अवधि जितनी लम्बी होगी सूर्य से प्राप्त ताप की मात्रा उतनी ही अधिक होगी तथा अवधि जितनी छोटी होगी ताप उतना ही कम मिलेगा। ग्रीष्म ऋतु में दिन की अवधि बड़ी होती है अतः ताप अधिक प्राप्त होता है।
1. वायुमण्डल में उपस्थित ताप की मात्रा के मान या मापन को तापमान कहा जाता है।
2. वायुमण्डल में ताप की प्राप्ति सूर्य से होती है।
3. सूर्य द्वारा ताप के विसर्जन को "सौर विकिरण" कहते हैं।
4. पृथ्वी द्वारा ताप के पुनः विसर्जन को 'पार्थिव विकिरण' कहा जाता है।
5. वायु तीन क्रियाओं- विकिरण, संचलन और संवहन द्वारा गर्म होती है।
6. धरातल पर ताप प्राप्ति की मात्रा- सूर्य किरणों के झुकाव, दिन की अवधि, समुद्रतल से ऊँचाई और वायुमण्डल की चौड़ाई पर निर्भर करती है।
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