भाषा साहित्य एवं विज्ञान
Language Literature and Science
(1) प्राथमिक शिक्षा केन्द्र पूर्ववत् मंदिर व मस्जिद होते थे। कुछ स्थानों पर प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना की गयी थी।
(2) उच्च शिक्षा के लिए टोल (महाविद्यालय) व मदरसों की व्यवस्था होती थी।
(3) केन्द्रीय स्तर पर फारसी भाषा का प्रयोग होता था, जिसके प्रभाव से भारतीय भाषाओं में भी फारसी के बहुत से शब्दों का प्रयोग होने लगा था।
(4) हिन्दी और फारसी के सम्मिश्रण से इस काल में एक नई भाषा 'उर्दू' जन्म हुआ, जो पारस्परिक बोलचाल की भाषा बन गई थी।
(5) उर्दू भाषा का व्याकरण हिंदी की तरह ही है, किन्तु इसके शब्दकोश में फारसी व हिन्दी भाषाओं के शब्द लिए गए है।
(6) इस काल में क्षेत्रीय भाषाओं का विकास हुआ, जिनमें उत्तम साहित्य की रचना हुई।
(7) कुछ हिन्दू राज्यों (जैसे विजयनगर) के राज दरबार में संस्कृत भाषा का प्रयोग किया जाता था संस्कृत ग्रंथों के अनुवाद, भारतीय भाषाओं के साथ-साथ अरबी व फारसी भाषा में भी होने लगे थे।
(8) कागज का प्रचलन बढ़ने से अनेक प्राचीन ग्रंथों का पुनः लेखन हुआ।
इस काल के प्रसिद्ध दार्शनिक व साहित्यकार अमीर खुसरो ने अपनी रचनाओं में उर्दू, फारसी व हिन्दी भाषा का प्रयोग किया। वे पहले ऐसे मुस्लिम लेखक थे, जिन्होंने सर्वाधिक रचनाओं में हिन्दी भाषा का प्रयोग किया। इस काल के प्रसिद्ध कवि व लेखकों ने निम्नलिखित ग्रंथों की रचना की-
(1) श्रीनाथ - हरविलास
(2) मलिक मोहम्मद जायसी - पद्मावत्
(3) अमीर खुसरो - पहेलियाँ मुकरियाँ
(4) नरपतिनाल्ह - बीसलदेव रासो तथा खुमान रासो
(5) विद्यापति - मैथिली भाषा में लिखे पद
कबीर दास जी के दोहे व भक्ति गीत प्रमुख रूप से उल्लेखनीय है।
अलाउद्दीन खिलजी के दरबार में प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो व अमीर दहलवी रहते थे। खुसरो अपनी पहेलियों, दोहों व कव्वालियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
चिकित्सा
Medicine
इस काल में मौलाना बदरूद्दीन, मौलाना सदरूद्दीन तथा अजीमुद्दीन प्रसिद्ध चिकित्सक थे। शल्य चिकित्सा के लिए प्रसिद्ध वैद्य मच्छेन्द्र व जोग का नाम उल्लेखनीय है। बर्नी ने अपनी पुस्तक तारीख-ए-फीरोजशाही में चिकित्सकों व खगोल शास्त्रियों की एक लंबी सूची प्रस्तुत की है।
वास्तुकला
architecture
तुर्क और अफगानों के आगमन के साथ- (फारस और मध्य एशिया) वास्तुकला की नई शैली भी भारत आई।
प्राचीन भारतीय वास्तुकला शैली में इस नई शैली के सम्मिश्रण से वास्तुकला के एक नवीन रूप का विकास हुआ।
(1) नुकीले मेहराब और गुम्बद तथा ऊंची सँकरी मोनारे इस काल की वास्तुकला की महत्वपूर्ण विशेषता थी।
(2) इस समय के अनेक शासकों ने उल्लेखनीय निर्माण कार्य करवाए, जिनमें प्रमुख हैं।
(अ) दिल्ली की कुतुबमीनार
(ब) फिरोजशाह का दुर्ग- फिरोजशाह कोटला
(स) अलाई दरवाजा
(द) लाल महल
(इ) तुगलकाबाद का किला
(ई) लोदी सुल्तानों के रंग-बिरंगे खपरैलों की डिजाइनों से सजे मकबरे
जौनपुर के शासकों द्वारा बनवाई गई, अनेक मस्जिदे और मालवा के शासकों द्वारा मांडू की पहाड़ियों पर सुंदर राजमहल बनवाये गए। इस काल में दक्षिण में बीजापुर का गोलगुंबद बनाया गया जो संसार के बड़े गुंबदों में प्रमुख माना जाता है।
(3) दक्षिण के शासकों ने किलों के अंदर शानदार इमारतें बनवायी। दौलताबाद और गोलकुंडा के किले इसके प्रमुख उदाहरण है।
(4) सुदूर दक्षिण में विजयनगर के शासकों द्वारा मंदिरों का निर्माण व जीर्णोद्वार करवाया गया। इनके द्वारा बनवाई गई इमारतों की सजावट व नक्काशी बहुत सुंदर है।
चित्रकला
painting
लघु चित्रों को बनाने की परंपरा इस समय जारी थी। शासकों द्वारा कलाकारों को राजाश्रय दिया जाता था। ये कलाकार शासको व दरबारियों की पुस्तकों को चित्रों के माध्यम से सजाने का कार्य करते थे।
संगीत
music
फारस और अरब की संगीत शैली का प्रभाव, भारतीय संगीत पर पड़ा। दोनों के समन्वय से सितार, सारंगी, तबला, जैसे वाद्य यंत्र लोकप्रिय हुए तथा गायन की नई विधा कव्वाली का उदय हुआ।
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