संसद के कार्य एवं शक्तियाँ, कानून बनाना, संविधान संशोधन, मंत्रि-परिषद् पर नियंत्रण, वित्तीय कार्य, गणपूर्ति |

संसद का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है, कानून बनाना।

संसद के कार्य एवं शक्तियाँ, कानून बनाना, संविधान संशोधन, मंत्रि-परिषद् पर नियंत्रण, वित्तीय कार्य, गणपूर्ति |

संसद के कार्य एवं शक्तियाँ

Functions and Powers of Parliament

संसद का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है, कानून बनाना। यह देश के लिए कानून बनाती है व संघीय सूची के समस्त विषयों पर कानून बना सकती है। साथ ही समवर्ती सूची के विषयों तथा अवशिष्ट विषयों पर भी कानून बनाती है। ऐसे कानून सारे देश में लागू होते है। संसद के कार्य एवं शक्तियाँ इस प्रकार है।

कानून बनाना

law making

संसद को संघ सूची के 97 विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है। वह समवर्ती सूची के सभी 52 विषयों पर भी कानून बना सकती है। साथ ही अवशिष्ट विषयों की सूची पर भी समय-समय पर कानून बनाती है।

संविधान संशोधन

Constitutional Amendment

संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार है। हमारा संविधान 26 जनवरी 1950 से सारे देश में लागू हुआ है। विगत वर्षों में सारे विश्व में बहुत परिवर्तन हुए हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। अतः समयानुकूल वर्तमान राष्ट्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर संविधान में संशोधन की आवश्यकता महसूस की जाती रही है। हमारे संविधान निर्माताओं द्वारा भावी परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए संविधान में संशोधन की प्रक्रिया तय की गई है। भारतीय संसद निर्धारित प्रक्रिया से संविधान में संशोधन करती है। संविधान में जनवरी 2012 तक, 97 संशोधन किए जा चुके है।

मंत्रि-परिषद् पर नियंत्रण

Control over the Council of Ministers

केन्द्रीय मंत्रि-परिषद् का गठन संसद के सदस्यों के बीच से ही किया जाता है। संसद ही इसे मंत्रि-परिषद् पर नियंत्रण रखती है। यह नियंत्रण सदन में प्रश्न पूछकर, काम रोको प्रस्ताव, विधेयकों पर बहस एवं अस्वीकृति निंदा तथा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, अविश्वास प्रस्ताव द्वारा किया जाता है।

वित्तीय कार्य

Financial Functions

संसद देश की वित्तीय व्यवस्था पर नियंत्रण रखती है। वह हर वर्ष आय के स्रोत एवं राजकीय कार्य संचालित करने हेतु व्यय नीति बनाती है। इसके साथ ही बजट निर्धारित कर उसे स्वीकृत करती है। ऐसे विधेयक जिनका संबंध वित्तीय व्यवस्था से है, उसे वित्त (धन) विधेयक कहते हैं। वित्त विधेयक राष्ट्रपति की अनुमति से ही लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है।

संसद का अधिवेशन

Session of Parliament

संसद के दोनों सदनों (राज्यसभा एवं लोकसभा) के प्रतिवर्ष दो अधिवेशन होने अनिवार्य हैं। दोनों अधिवेशनों के बीच छः माह से अधिक का अन्तर नहीं होना चाहिए। राष्ट्रपति को अधिकार है कि वह कभी भी संसद का अधिवेशन बुला सकते हैं। वे संसद के सत्र को समाप्त भी कर सकते है।

गणपूर्ति

Quorum

गणपूर्ति से आशय है संसद के किसी भी सदन की बैठक के लिए सदन में न्यूनतम कितने सदस्यों का उपस्थित होना आवश्यक है। संविधान के अनुसार संसद के दोनों सदनों में बैठक के लिए कुल सदस्य संख्या की 1/10 (10%) सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है।

आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
B B Patle
edubirbal.com

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