गतिविधि–
Activity–
जिस तरह से लट्टू अपनी कील पर घूमता है और साथ ही साथ अण्डाकार चक्कर भी लगाता है, ठीक इसी तरह हमारी पृथ्वी भी अंतरिक्ष में अपनी धूरी पर घूमने के साथ-साथ अण्डाकार पथ पर सूर्य की परिक्रमा भी करती है।
इस प्रकार पृथ्वी की दो गतियाँ है।
(अ) घूर्णन अथवा दैनिक गति
(ब) परिक्रमण अथवा वार्षिक गति
(अ) घूर्णन गति
(a) rotational speed
पृथ्वी अपनी धुरी अथवा अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूम रही है। पृथ्वी की इस गति को ही घूर्णन गति कहते हैं। पृथ्वी को अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में लगभग 24 घण्टे लगते है अर्थात् एक दिन और रात का समय (12 घण्टे का दिन और १२ घण्टे की रात) लगता है। इसी कारण इस गति को दैनिक गति भी कहते हैं।
(ब) परिक्रमण गति
(b) speed of rotation
पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमने के साथ-साथ एक अण्डाकार मार्ग पर सूर्य के चारों ओर परिक्रमा भी करती है। पृथ्वी की इस गति को परिक्रमण गति कहते हैं। पृथ्वी सूर्य की एक परिक्रमा 365% दिन अर्थात् एक वर्ष में पूरी करती है। इसलिए पृथ्वी की इस गति को वार्षिक गति भी कहते हैं।
पृथ्वी की गतियों का प्रभाव
Effects of Earth's motions
पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण हम सूर्योदय व सूर्यास्त, दिन और रात का होना देखते हैं। परिक्रमण गति के कारण ऋतुओं को बदलते हुए अनुभव करते हैं हम पिछली कक्षा में यह भी पढ़चुके हैं कि सूर्य एक तारा है और पृथ्वी के सापेक्ष में स्थिर है लेकिन पृथ्वी गति कर रही है। चूँकि हम गतिशील पिण्ड पर निवास करते हैं इसलिए हमें पृथ्वी स्थिर और सूर्य चलता हुआ प्रतीत होता है, यह ठीक उसी तरह होता है जिस तरह हम बस/रेलगाड़ी में सफर करते हैं तो हमें बाहर स्थिर पेड़-पौधे व मकान तेजी से पीछे भागते हुए प्रतीत होते हैं। वास्तव में हम जिस वाहन में सफर कर रहे होते हैं, वह गति कर रहा होता है। इसी प्रकार हमें सुबह सूर्य पूर्व दिशा से उगते हुए दिखता है, दिन भर आकाश में ऊपर जाते हुए शाम को पश्चिम में धीरे-धीरे अस्त होता हुआ दिखाई पड़ता है। जबकि वास्तव में पृथ्वी के पश्चिम से पूर्व की ओर अपनी धुरी पर घूमने के कारण ही हमें पूर्व में सूर्योदय होते हुए व पश्चिम में सूर्यास्त होता हुआ दिखाई देता है।
दिन-रात का होना
day-night
दिन-रात का होना पृथ्वी की दैनिक गति का परिणाम है। पृथ्वी को प्रकाश सूर्य से प्राप्त होता है। पृथ्वी अपने अक्ष पर 24 घंटे में एक बार पूरा घूम जाती है। इस घूर्णन के दौरान पृथ्वी का प्रत्येक भाग बारी-बारी से सूर्य के सामने आता है, जिससे सूर्य के सामने वाले भाग, जिस पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है, पर दिन व पीछे वाले भाग पर जहाँ सूर्य का प्रकाश नहीं पड़ता वहाँ रात होती है। आइए, इसे गतिविधि के माध्यम से समझें।
गतिविधि-
activity-
ग्लोब पर टार्च से प्रकाश कीजिए और ग्लोब को पश्चिम से पूर्व की ओर घुमाइए। दिन व रात की गतिविधि चित्रानुसार कक्षा में करवाते हुए दिन-रात की प्रक्रिया को समझा जा सकता है। इस हेतु एक बड़ी गेंद या ग्लोब पर पहले से एक चिन्ह बना लें फिर टार्च/मोमबत्ती से गेंद/ग्लोब पर प्रकाश डाले व गेंद/ग्लोब को पश्चिम से पूर्व की ओर घूमाएँ व बच्चों को ध्यान से देखने को कहें कि वे चिह्नित स्थान को देखें, कि वह किस प्रकार से कभी प्रकाश तो कभी अंधकार प्राप्त कर रहा है। ठीक इसी प्रकार पृथ्वी के प्रत्येक स्थान पर 24 घण्टे के दौरान दिन व रात होते हैं।
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