वायुमण्डल परिचय
Atmosphere Introduction
हमारी पृथ्वी के चारों ओर फैले वायु के आवरण को वायुमण्डल कहते हैं। यह समुद्र तल से लगभग 1600 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है। वायुमण्डल घनत्व भी होता है, जो ऊँचाई के अनुसार तेजी से घटता जाता है। वायु का लगभग 97 प्रतिशत भाग धरातल से 30 किलोमीटर की ऊँचाई तक पाया जाता है। पृथ्वी से ज्यों-ज्यों दूर होते जाते हैं, वायु विरल होती जाती है।।
महत्व
importance
पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व बनाए रखने के लिए वायुमण्डल का बहुत महत्व है।
1. यह सूर्य की पराबैंगनी घातक किरणों से पृथ्वी के जीवनधारियों को बचाने में सहायक है।
2. यह पृथ्वी पर जीवन हेतु अनुकूल तापमान बनाए रखता है। जिससे पृथ्वी का धरातल न अधिक गर्म और न अधिक ठण्डा होता है।
3. वायुमण्डल पृथ्वी पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ध्वनि तरंगों को भेजने का माध्यम है। वायुयान की उड़ानें भी वायुमण्डल के कारण सम्भव हो सकी हैं।
4. पृथ्वी पर मौसमी परिवर्तन जैसे ताप सन्तुलन, वायु का संचार, वर्षा आदि वायुमण्डल के कारण ही संभव है।
5. हमारे जीवन को बनाए रखने के लिए इसमें प्राणदायी गैस एवं रक्षक गैसे भी हैं।।
वायुमंडल का संगठन
Organization of the atmosphere
हमारे चारों ओर फैली वायु अनेक गैसों का मिश्रण है। इनमें नाइट्रोजन 78 प्रतिशत, ऑक्सीजन 21 प्रतिशत तथा १ प्रतिशत अन्य गैसें, जिनमें आर्गन, कार्बन डाई ऑक्साइड, हाइड्रोजन, होलियम तथा ओजोन पाई जाती हैं। साथ ही कुछ मात्रा में जलवाष्प, धूलकण, धुआं आदि विद्यमान रहते हैं। ऑक्सीजन जीवन दायिनी गैस है। नाइट्रोजन सर्वाधिक मात्रा में होते हुए भी अप्रत्यक्ष रुप से वनस्पति के विकास में सहायक होती है। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिलने से पानी बनता है। कार्बन डाइऑक्साइड और जल दोनों पेड़-पौधों के विकास के लिए आवश्यक है। ओजोन गैस सूर्य से आने वाली घातक पराबैगनी किरणों से हमारी रक्षा करती है।
1. पृथ्वी के चारों ओर फैले वायु के आवरण को वायुमण्डल कहते हैं।
2. वायुमण्डल का विस्तार समुद्र तल से 1600 किलोमीटर तक है।
3. वायु विभिन्न गैसों का मिश्रण है।
4. वायुमण्डल में नाइट्रोजन 78 प्रतिशत, ऑक्सीजन 21 प्रतिशत (दोनों मिलकर 99 प्रतिशत है) के अलावा 1 प्रतिशत आर्गन, कार्बन-डाई-ऑक्साइड, हाइड्रोजन, हीलियम तथा ओजोन गैसें पाई जाती हैं।
5. ऑक्सीजन 'जीवनदायी' तथा ओजोन 'जीवनरक्षक' गैस है।।
वायुमण्डल की संरचना
Structure of the atmosphere
तापक्रम की भिन्नता और तापक्रम में परिवर्तन की दर के आधार पर वायुमंडल को पाँच परतों में बाँटा जाता है।
(1) क्षोभमण्डल
(2) समतापमण्डल
(3) मध्यमण्डल
(4) उष्मामण्डल
(5) बाहामण्डल।
क्षोभमण्डल
troposphere
ध्रुवों पर इसकी ऊँचाई 8 किलोमीटर तथा विषुवत् वृत्त पर 18 कि.मी. तक है। इस परत में जलवाष्प तथा धूल कण पाए जाते हैं। इसमें मौसम सम्बन्धी सभी घटनाएं जैसे बादल, वर्षा और तूफान आदि घटित होती हैं। इसी परत में सभी प्रकार का जीवन पाया जाता है। इसमें ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ तापमान घटता जाता है। धरातल से प्रति 165 मीटर ऊँचाई के साथ 1° सेल्सियस की दर से तापमान घटता है। इस मण्डल को परिवर्तन मण्डल के नाम से भी जानते हैं।।
समतापमण्डल
Stratosphere
वायुमण्डल की दूसरी परत समताप मण्डल कहलाती है। चित्र क्र. 17 में देखकर इसकी ऊँचाई ज्ञात कीजिए। इसमें 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक तापमान समान रहता है। फिर क्रमशः बढ़ने लगता है।।
मध्यमण्डल
Mesosphere
इस मण्डल की ऊँचाई समुद्रतल से 50 से 80 किलोमीटर है। इस मण्डल में जलवाष्प, बादल तथा धूल कण की कमी के कारण तापक्रम कम है और पवन काफी तीव्र गति से बहती है।।
ऊष्मामण्डल
Thermosphere
ऊष्मामण्डल का फैलाव समुद्रतल से 80 कि.मी. की ऊँचाई से शुरू होता है। इस मण्डल में वायु का घनत्व बहुत कम है। इसमें ऊँचाई के साथ-साथ तापक्रम बढ़ता है। इन मण्डलों में गैसों की दो परतें भी हैं, जिन्हें ओजोन परत और आयन परत (आयनमण्डल) कहते हैं। ओजोन परत का फैलाय पृथ्वी से 32 से 80 किलोमीटर की ऊंचाई तक है। इसमें ओजोन गैस की प्रधानता है। यह परत सूर्य से पृथ्वी पर आने वाली हानिकारक पराबैगनी किरणों को सोख लेती है। आयन परत पृथ्वी से 80 से 400 किलोमीटर की ऊँचाई पर है। इस परत में मौजूद विद्युत कण पृथ्वों से प्रक्षेपित तरंगों को रोककर पुनः पृथ्वी पर लौटा देती है। इस तरह यह हमें रेडियो ट्रांजिस्टर के माध्यम से विभिन्न प्रकार के रेडियो प्रोग्राम सुनने में मदद करती है। ध्रुवों पर ध्रुवीय प्रकाश की झलक इस परत के कारण ही दिखाई देती है।।
बाह्यमण्डल
exosphere
यह वायुमण्डल की सबसे बाहरी परत है। इसकी ऊपरी सीमा अनिश्चित है। इस परत में वायु का घनत्व सबसे कम है। यहाँ वायु विरल होती है।।
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