व्यक्ति
(person)
व्यक्ति परिवार की एक इकाई है। व्यक्ति अपने परिवार में रहते हुए पलते-बढ़ते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में अपना विकास करते हैं। यदि आप अपने में कभी अकेले रहे हों, तो बताइए कि उस समय आपको कैसा लगा। यदि अधिक समय तक अकेले रहना पड़ा होगा तो आपको निश्चित ही अच्छा नहीं लगा होगा।
व्यक्ति की विशेषताएँ उसके वैयक्तिक गुण, भोजन, वस्त्र, आवास आदि के आधार पर निर्धारित होती है। समाज में व्यक्ति राजनेता, धर्म उपदेशक, अध्यापक, न्यायाधीश, चिकित्सक, कृषक एवं श्रमिक आदि पद धारण कर विभिन्न कार्य करता है एवं समाज में अपनी पहचान बनाता है।
परिवार
(Family)
परिवार में व्यक्ति एक इकाई है। एकल परिवार में प्रायः पति-पत्नी, उनके पुत्र-पुत्रियाँ एवं संयुक्त परिवारों में पति-पत्नी व पुत्र-पुत्रियों के अतिरिक्त, दादा-दादी, चाचा-चाची आदि भी शामिल होते हैं।
परिवार में व्यक्तियों के साथ-साथ रहने पर सुरक्षा का भाव पैदा होता है। परिवार के सदस्यों की परिवार में व्यक्तिगत आवश्यकताएँ भी पूरी होती हैं। परिवार के बड़े एवं बुजुर्ग सदस्यों का प्यार, सीख व मार्गदर्शन छोटों को प्राप्त होता है। माता को प्रथम गुरू भी कहा गया है। बच्चे को प्रथम शिक्षा परिवार में माता के माध्यम से प्राप्त होती है। परिवार के बड़े सदस्य बच्चों की साफ-सफाई, स्वास्थ्य व शिक्षा का ध्यान एवं बड़े-बूढ़ों की देखभाल सहर्ष करते हैं। बच्चों को आगे की शिक्षा प्राप्त करने के लिए परिवार ही उन्हें विद्यालयों को सौंपता है। परिवार के छोटे सदस्य भी वृद्धजनों की देखभाल करते हैं, व बड़ों का आदर करते हैं।
आपस में रिश्तेदारी, रक्त संबंध होते हुए एक घर में रहने वाले सदस्यों से मिलकर परिवार बनता है। छोटे परिवार को आदर्श परिवार माना गया है। विद्यालय भी परिवार के समान है।
समाज
(Society)
कई परिवारों से मिलकर समाज का निर्माण होता है। परिवार समाज की एक इकाई है। एक प्रकार के समाज में खान-पान, रहन-सहन, रीति-रिवाज, परम्पराएँ एवं प्रथाएँ प्रायः एक ही प्रकार के होते हैं।
वर्तमान में बदलते आर्थिक एवं सामाजिक संदर्भों में समाज नए प्रकार से भी संगठित हो रहे हैं। इन परिवर्तनों में शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है। इनका उद्देश्य सामाजिक रीति-रिवाजों में आ गई कुरीतियों को दूर करना है। वर्तमान में जागरूक समाज के लोग अपने-आपको संगठित कर एक मंच पर आना शुरू हो गए हैं। वे अशिक्षा, बाल-विवाह, दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए कार्य कर रहे हैं। यह नवीन सामाजिक प्रवृत्ति का परिचायक है। ऐसे संगठित समाज के लोगों ने अपने समाज के नियमों का भी निर्धारण किया है और सामाजिक क्रियाकलापों द्वारा व समाज के सदस्यों को विभिन्न प्रकार से प्रोत्साहन भी दे रहे हैं।
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, अतः समाज से पृथक रहकर वह अपनी तथा अपने सामाजिक हितों की रक्षा नहीं कर सकता। यदि मनुष्य, मनुष्य की भांति रहना चाहता है, तो उसे अपने आसपास के लोगों से अच्छे सम्बन्ध बनाए रखने चाहिए।
समाज एक व्यवस्था है। प्रत्येक समाज की एक संरचना होती है। समाज का अपना संगठन होता है। समाज का आधार सामाजिक संस्थाएँ और संबंध होते हैं।
इन 👇 इतिहास के प्रकरणों के बारे में भी जानें।
1.इतिहास जानने के स्रोत कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान
2.आदिमानव कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान
3.परिवार एवं समाज कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान
सामाजिक संबंध
(Social Relations)
यदि दो व्यक्ति रेलगाड़ी या बस में साथ-साथ यात्रा कर रहे हैं और आपस में बातचीत भी कर रहे हैं, तो इतने मात्र से सामाजिक संबंध नहीं बन जाते। यह कुछ देर का संपर्क मात्र है। यदि सम्पकों को बढ़ाया जाए, एक-दूसरे के सुख-दुःख में शामिल हुआ जाए तथा सम्पकों को किसी प्रकार का स्थाई आधार दिया जाए और इनका निर्वाह भी किया जाए तो सामाजिक संबंधों की स्थापना हो सकती है।
समाज कैसे बनता है–
(How Society Builds–)
समाजशास्त्रियों ने समाज को सामाजिक संबंधों का जाल माना है। वास्तव में अनेक परिवारों के आपसी संबंधों से समाज का निर्माण होता है। मनुष्य सामाजिक प्राणी है अतः वह परिवार एवं समाज दोनों से जुड़कर रहता है। व्यक्ति के जीवन में विवाह हेतु उचित साथी का चुनाव तथा विवाह के बाद बच्चों का पालन-पोषण उनकी शिक्षा-दीक्षा की व्यवस्था करना आदि की चिंताएँ सामने आती है। समाज के सदस्य एवं उसके पारिवारिक मित्र आदि इन समस्याओं को सुलझाने में अपनी राय भी देते है।
एक उन्नत समाज में व्यक्तियों की आपस में निर्भरता, साथ-साथ कार्य करने की भावना, व्यक्तिगत विचारों का सम्मान एवं किसी सामाजिक घटना का सही-गलत विश्लेषण करने की, क्षमता पाई जाती है।
शिक्षित समाज अनेक सामाजिक समस्याओं जैसे कम उम्र में विवाह, अधिक संतानों का होना, बच्चों को प्रारंभिक एवं अनिवार्य शिक्षा न दिलाना जैसी बुराइयों पर नियंत्रण लगा सकता है।
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2. सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल एवं उनके नाम
3. सिंधु घाटी सभ्यता का नामकरण तथा नगर योजना
4. भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण काल'
आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
B B Patle
edubirbal.com
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