संविधान में जनजातीय कल्याण के लिए कुछ व्यवस्थाएँ | Some provisions for tribal welfare in the constitution.

जनजातीय विकास के लिए हमारे संविधान निर्माता भी सजग रहे।

संविधान में जनजातीय कल्याण के लिए कुछ व्यवस्थाएँ | Some provisions for tribal welfare in the constitution.

जनजातीय विकास के लिए हमारे संविधान निर्माता भी सजग रहे एवं जनजातियों के विकास के लिए संवैधानिक प्रावधान किये हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं-
1. राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध धर्म, वंश, जाति, लिंग आदि के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगा।
2. सार्वजनिक स्थलों, दुकानों, सड़कों, कुंआ, तालाबों आदि के प्रयोग से कोई किसी को नहीं रोकेगा।
3. व्यवसायों को स्वतंत्र रूप से करने की व्यवस्था की गई है।
4. शिक्षण संस्थाओं में धर्म, जाति, वंश अथवा भाषा के आधार पर प्रवेश से नहीं रोका जावेगा।
5. लोक सभा, विधान सभाओं, पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में इन वर्गों के लिये स्थानों के आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
6. संघ एवं राज्य सरकारों की सेवाओं में भी आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
संविधान की मूल भावना में यह है कि इन वर्गों के कल्याण एवं विकास कार्यक्रमों का क्रियान्वयन समर्पित भाव से किया जावेगा, ताकि ऐसे समाज की स्थापना हो सके, जिसमें प्रत्येक नागरिक को अपने पूर्ण सामर्थ्य से उसके व्यक्तित्व का विकास हो।

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