मौर्य साम्राज्य– चन्द्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसार | Maurya Empire – Chandragupta Maurya, Bindusara.

भारतीय इतिहास में जनपदों, महाजनपदों और मगध साम्राज्य के बाद नंद राजाओं ने शासन किया। महापद्मानंद, नंद वंश का शासक था।

 मौर्य साम्राज्य– चन्द्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसार | Maurya Empire – Chandragupta Maurya, Bindusara.

मौर्य साम्राज्य की उत्पत्ति Origin of Maurya Empire

भारतीय इतिहास में जनपदों, महाजनपदों और मगध साम्राज्य के बाद नंद राजाओं ने शासन किया। महापद्मानंद, नंद वंश का शासक था। नंद राजा के पास बहुत ही संपत्ति थी। वह भारत का शक्तिशाली राजा था। उसके पास बहुत बड़ा साम्राज्य था, किंतु नंद राजा बहुत ही क्रूर शासक था। उससे मगध की जनता बहुत परेशान थी। इसीलिए उसे सत्ता से हटाने का कार्य चंद्रगुप्त मौर्य ने किया। चंद्रगुप्त के सहयोगी कौटिल्य (चाणक्य) थे। दोनों ने मिलकर नंद राजा को उसकी गद्दी से हटाने की योजना बनाई। इस योजना के अंतर्गत चंद्रगुप्त और चाणक्य ने मिलकर पंजाब पर अधिकार कर लिया। उसके बाद उन्होंने नंद राजा को उसके गद्दी से हटा दिया। यह घटना 322 ईसा पूर्व के दौरान हुई थी। इसके बाद चंद्रगुप्त मौर्य, मगध के राजा बन गए। उन्होंने पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) को अपनी राजधानी बनाया।
जब राजा अपने राज्य की सीमा का बहुत अधिक विस्तार कर लेते हैं, तो उस स्थिति में राज्यों को साम्राज्य कहा जाता है। मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य थे। उनके बाद उनके पुत्र बिंदुसार ने मगध पर शासन किया।

चंद्रगुप्त मौर्य Chandra Gupta Mourya

यूनानी शासक सिकंदर ने भारत के कुछ क्षेत्रों जैसे- सिंधु, अफगानिस्तान आदि को जीत लिया था। उसने जीते हुए क्षेत्रों में प्रशासक के रूप में सेल्यूकस निकेटर को नियुक्त किया था। चंद्रगुप्त मौर्य ने राजा बनने के बाद सेल्यूकस निकेटर को युद्ध में हराया और सिंधु व अफगानिस्तान के क्षेत्र में अधिकार कर लिया। इसके बाद सेल्यूकस निकेटर और चंद्रगुप्त मौर्य के बीच संधि हो गई। संधि होने के बाद सेल्यूकस निकेटर ने अपनी पुत्री का विवाह चंद्रगुप्त मौर्य से करवा दिया। इसके बाद सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार (पाटलिपुत्र) में अपना राजदूत 'मेगस्थनीज' भेजा। मेगस्थनीज ने 'इंडिका' नामक पुस्तक लिखी है। उसमें मौर्यकालीन समाज का वर्णन किया गया है।

बिंदुसार Bindusara

बिंदुसार चंद्रगुप्त मौर्य के पुत्र थे। उन्हें स्वयं चंद्रगुप्त मौर्य ने गद्दी पर बैठाया था। चंद्रगुप्त मौर्य अपने जीवन के अंतिम दिनों में जैन मुनि बन गए थे। इसीलिए वे बिंदुसार को सारा राज-पाठ देकर अपने राज्य एवं घर परिवार से दूर चले गए थे। अपने शासनकाल के दौरान बिंदुसार ने भारतवर्ष के मैसूर तक अपने राज्य का विस्तार कर लिया था। कलिंग और सुदूर दक्षिण के कुछ राज्यों को छोड़कर लगभग समस्त देश मौर्य साम्राज्य में सम्मिलित था। दक्षिण के राज्य के राजाओं के साथ बिंदुसार की मित्रता थी। इस कारण दक्षिण के राज्यों और मौर्य साम्राज्य के बीच युद्ध नहीं होते थे, किंतु कलिंग (वर्तमान उड़ीसा) के शासक मौर्यों का साथ नहीं देना चाहते थे। इस कारण मौर्य शासकों और कलिंग शासकों के बीच युद्ध हुए थे।

आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
B B Patle
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