मौर्यकालीन समाज
मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक 'इंडिका', में जो कि यूनानी भाषा में लिखी थी, इसमें उस समय के भारतीय समाज का वर्णन है जैसे, अधिकतर लोग खेती करते थे और लोग सुखपूर्वक गाँव में रहते थे। चरवाहे और गड़रिये भी गाँव में ही रहते थे बुनकर, बढ़ई, लोहार, कुम्हार और अन्य कारीगर नगरों में रहते थे। ये राजा के उपयोग की वस्तुएं तथा नागरिकों के लिए सामान बनाते थे। व्यापार उन्नति पर था और व्यापारी दूर-दूर तक अपना माल बेचने जाया करते थे। ये लोग समुद्र के पार फारस की खाड़ी होते हुए पश्चिमी देशों को जाते थे। बड़ी संख्या में लोग सेना में भर्ती होते थे। सैनिकों को अच्छा वेतन मिलता था। समाज में ब्राह्मण, जैन और बौद्ध भिक्षुओं का सम्मान किया जाता था। इस काल में चांदी सोने तांबे के सिक्के चलते थे। पर्दा प्रथा नहीं थी। जीवन सरल सुखद व मितव्ययिता पूर्ण था।
मध्यप्रदेश में मौर्यकाल के स्तूप साँची, भरहुत (सतना), सतधारा, तुमैन (जिला गुना), बरहट (जिला रीवा), उज्जैन आदि जगहों पर बने हैं। क्ष अशोक का साँची स्तूप, जिस पर चार सिंह बने से हैं, अब साँची के संग्रहालय में रखा है। अशोक के मौ स्तंभ लेख साँची व बरहट से मिले हैं तथा शिलालेख स दतिया के पास गुजर्रा गाँव तथा भोपाल के पास पानगुराड़िया (नचने की तलाई) स्थान पर है। य जबलपुर के निकट रूपनाथ स्थल से अशोक का लघु शिलालेख मिला है। साँची के बौद्ध स्मारक विश्व प्रसिद्ध है। इसे विश्वदाय भाग में सम्मिलित किया गया है। उज्जैन में अशोक 11 वर्ष अवन्ति का गवर्नर रहा, उसके पुत्र महेन्द्र तथा पुत्री संघमित्रा का जन्म उज्जैन में हुआ था। अशोक की एक रानी विदिशा की थी।
मौर्य कला
अशोक ने अपने संदेश चमकीली शिलाओं तथा स्तंभों पर खुदवाएं। स्तंभों के शीर्ष पर हाथी, सॉड या सिंह की प्रतिमा बनाई गई थी। सारनाथ के स्तंभ पर चार सिंहों की आकृति बनी हुई है। ये स्तंभ आज भी देखे जा सकते हैं। सन् 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद अशोक के सारनाथ स्तंभ की चार सिंहों वाली कलाकृति को राष्ट्रीय चिन्ह के रूप अपनाया गया। यह सिंह स्तंभ आज सारनाथ के संग्रहालय में रखा है। इस काल में कई स्तूप, स्तंभ तथा भिक्षुओं के रहने के लिए बिहार व पर्वतों को काटकर गुफाएं बनवायी गयी। मूर्तियों में यक्ष और यक्षणी तथा पशुओं की मूर्तियाँ बनायी गयी थीं।
मौर्य साम्राज्य का पतन
सम्राट अशोक और उसके पूर्वजों द्वारा स्थापित विशाल मौर्य साम्राज्य लगभग सौ वर्षों से कुछ अधिक समय तक चलता रहा और अशोक की मृत्यु होने के पश्चात वह छिन्न-भिन्न होने लगा। इतने विशाल साम्राज्य में दूर-दूर तक सम्पर्क व प्रशासन करने में कठिनाइयाँ होती हैं। अशोक के उत्तराधिकारी उसकी तरह कुशल और योग्य नहीं थे। विशाल साम्राज्य के संचालन के लिए आवश्यक राशि भी कर के रूप में वसूल नहीं कर पा रहे थे। वे राजा जो अशोक के अधीन थे, अब स्वतंत्र होने लगे। इस प्रकार साम्राज्य कमजोर होता चला गया। फूट का परिणाम यह हुआ कि बैक्ट्रीया देश के यूनानी शासक ने पश्चिमोत्तर भाग पर हमला कर दिया। उस क्षेत्र के राजा को किसी अन्य राजा ने सहायता नहीं दी और वह पराजित हुआ। 185 वर्ष ई.पू. में पुष्यमित्र शुंग ने अंतिम मौर्य शासक वृहद्रथ का वध कर मौर्य साम्राज्य का अंत कर दिया और शुंग वंश की स्थापना हुई।
आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
B B Patle
edubirbal.com
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