मगध साम्राज्य की स्थापना एवं विस्तार (लगभग 544 ई.पू. से 430 ई.पू. तक) एवं शिशुनाग वंश | Establishment and expansion of Magadha Empire (from about 544 BC to 430 BC) and Shishunaga dynasty

सोलह जनपदों में मगध जनपद सबसे शक्तिशाली था।

मगध साम्राज्य की स्थापना एवं विस्तार (लगभग 544 ई.पू. से 430 ई.पू. तक) एवं शिशुनाग वंश | Establishment and expansion of Magadha Empire (from about 544 BC to 430 BC) and Shishunaga dynasty

मगध साम्राज्य की स्थापना एवं विस्तार (लगभग 544 ई.पू. से 430 ई.पू. तक)

Foundation and expansion of the Magadha Empire (from about 544 BC to 430 BC)

सोलह जनपदों में मगध जनपद सबसे शक्तिशाली था। मगध को एक बड़े साम्राज्य के रूप में विकसित करने का पहला चरण हर्यंकवंश के राजा बिंबिसार के नेतृत्व में पूरा हुआ। उसने अंग को जीतकर अपने राज्य में मिला लिया। इसके अलावा उसने वैवाहिक संबंधों के माध्यम से अन्य राज्यों से मधुर संबंध बनाये। इसके अंतर्गत कोशल, वैशाली तथा मद्रकुल (पंजाब) तक राजनैतिक प्रतिष्ठा को बढ़ाया। वह अवन्ति महाजनपद को जीत न सका तो उसने वहाँ के शासक वण्डप्रद्योत से मित्रा कर ली और मुगध को (ईसा पूर्व छठी (शताब्दी में) सबसे अधिक शक्तिशाली राज्य बना दिया। उसकी राजधानी राजगीर थी। उस समय इसे " गिरब्रज कहते थे। जीवक इसका राजवैद्य था। अपने पिता बिम्बिसार का वध करके अजातशत्रु ने मगध का सिहासन संभाला। अजातशत्रु ने शासन विस्तार में आक्रामक नीति से काम लिया। उसने पिता की रिश्तेदारी का कोई लिहाज न रखा। उसने युद्धों के दौरान, नये युद्ध यंत्रों का इस्तेमाल किया। उसकी सेना के पांस पत्थर फेकने वाला 'महासिलाकटक' एक यंत्र था। उसके पास एक ऐसा रथ था, जिसमें गदा जैसा हथियार जुड़ा हुआ था। इससे युद्ध में लोगों को बड़ी संख्या में मारा जा सकता था। इस यंत्र को 'रथमूसल' कहा जाता था।
अजातशत्रु के बाद उदयिन मगध की गद्दी पर बैठा। इसके काल में मगध का साम्राज्य उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में छोटा नागपुर की पहाड़ियों तक फैला हुआ था। उसने गंगा और सोन नदी के संगम पर पाटलिपुत्र (पटना) को अपनी राजधानी बनाया। मगध के सम्राटों का सबसे बड़ा शत्रु अवन्ति महाजनपद था। अवन्ति, उज्जैन का प्राचीन नाम है जो वर्तमान में मध्यप्रदेश का एक प्रमुख नगर है। उदयिन और अवन्ति राज के बीच भी संघर्ष चला परन्तु अवन्ति महाजनपद की स्वतंत्रता बनी रही। बाद में शिशुनागवंश के राजाओं ने इसे जीत कर अपने साम्राज्य में मिला लिया गया। मगध साम्राज्य के विस्तार एवं उन्नति के निम्न कारण थे–
1. इस क्षेत्र की भूमि उपजाऊ थी जिससे फसलों का अधिक उत्पादन होता था।
2. मगध क्षेत्र में अत्यधिक लोहे के भण्डारों के कारण मगध की सेना ने उन्नत हथियार और औजारों का उपयोग किया।
3. गंगा नदी में नौकाओं से व्यापार होता था अतः बंदरगाहों से व्यापारी काफी दूर-दूर तक आते-जाते थे।
4. मगध सम्राटों की दोनों राजधानियां- राजगीर तथा पाटलिपुत्र अत्यधिक सुरक्षित थी।
5. मगध की सेना के पास नये युद्ध यन्त्र थे जो अन्य सेनाओं के पास न थे।
6. मगध सम्राटों के पास हाथियों की सबसे बड़ी सेना थी। पुराने जमाने में गजसेना को महत्वपूर्ण माना जाता था।

शिशुनाग वंश

Shishunag lineage

शिशुनाग, काशी प्रदेश का शासक था। उसने उदायिन के पुत्र नागदासक को सिहासन से हटाकर अपने वंश की स्थापना की तथा वैशाली को अपनी राजधानी बनाया। उसकी सबसे बड़ी सफलता अवन्ति (जैन) के शासक को पराजित करने में थी। उज्जैन पर कब्जा करने में मगध को लगभग सौ साल क समय लगा। अब अवंति का क्षेत्र मगध साम्राज्य में मिल गया था।

आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
B B Patle
edubirbal.com

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