मिट्टी (मृदा)
जिस प्रकार हमारे शरीर को भोजन की आवश्यकता होती है। उसी प्रकार पौधों और फसलों के विकास के लिये पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। और मिट्टी में ये सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसलिए पौधों के लिए मिट्टी आवश्यक होती है।
मिट्टी में पाए जाने वाले पोषक तत्व
जीवन को उत्पत्ति एवं विकास के लिए मिट्टो अत्यंत आवश्यक प्राकृतिक सम्पदा है। हमारे लिये आवश्यक विभिन्न संसाधनों में से यह जीवन की तीन मूल आवश्यकताओं भोजन, कपड़ा और मकान को पूर्ण करने में सहायता करती है। हमारी मुख रूप से तीन भागों से मिलकर बनी हुयी है जिन्हें क्रमशः कोर मेण्टस्ट करते हैं। सबसे ऊपरो जटिल भाग जिसे कस्ट कहते हैं मिट्टी से डंका रहता है यही भाग कृषि में जुड़े विभिन्न क्रियाकलाप के लिये उपयोगी है। यह पौधों की वृद्धि के लिये आवश्यक जल एवं खनिज लवणों को एकत्रित करता है। अतः मिट्टी पृथ्वी की ऊपरी सतह का वह संग्रहित पदार्थ है जो चट्टानों एवं जैव पदार्थों से विभिन्न अपक्षय क्रियाओं द्वारा प्राप्त की जाती है तथा जिसमें पेड़-पौधे व फसलों की वृद्धि एवं विकास हेतु आवश्यक पोषक पदार्थ होते हैं।
सामान्य सी दिखने वालों मिट्टों किन पदार्थों से बनी होती है।
1. कई तरह की चट्टानें ताप, वर्षा, प्रकाश आदि के प्रभाव से धीरे-धीरे टूटकर मिट्टी में मिल जाती है।
2. पृथ्वी पर पाए जाने वाले सजीवों के शरीर मृत्यु के बाद सड़ जाते हैं सड़ने के बाद सूक्ष्म जीवों को क्रिया द्वारा जीवांश में बदल जाते हैं। जीवाश मिट्टी निर्माण का प्रमुख घटक है।
3. इनके अतिरिक्त जल (नमी) एवं वायु भी मिट्टी के मुख्य घटक हैं।
मिट्टी का संगठन
1. खनिज पदार्थ – 40-45%
2. जीवांश पदार्थ – 5-10%
3. हवा या वायु – 25%
4. जल या पानी – 25%
उपरोक्त चारों घटकों का प्रतिशत सभी प्रकार की मिट्टी में एक समान नहीं होता है, अतः मिट्टी का संगठन उसके प्रकार के अनुसार परिवर्तित होता रहता है।
मिट्टी और पर्यावरण -
अब आप समझ ही गये होंगे कि मिट्टी हमारे पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। नीचे दिए गए रेखा चित्र में मिट्टी का पर्यावरणीय महत्व दर्शाया गया है।
मिट्टी का महत्त्व
जीवों का आवास- केंचुए, कीड़े-मकोड़े, वृद्धि हेतु साँप, जीवाणु, फफूंद एवं अन्य जीव मिट्टी में ही रहते हैं।
पेड़-पौधों की वृद्धि- पौधों की आवश्यक जल एवं खनिज लवण मिट्टी से ही प्राप्त होते हैं।
पदार्थों का अपघटन एवं चक्रीकरण- पौधों एवं जन्तुओं के मृत शरीरों के अवशेष मिट्टी के सूक्ष्म जीवों द्वारा अपघटित कर दिए जाते हैं।
विभिन्न निर्माण कार्य- मिट्टी के पात्र, खिलौने, ईंटों इत्यादि के अतिरिक्त कच्चे मकान, खेल मैदानों का निर्माण भी मिट्टी से ही होता है।
पौधों की वृद्धि में पोषक तत्व
पौधों की वृद्धि एवं विकास हेतु लगभग 18 पोषक तत्व आवश्यक होते हैं। इन्हें तीन वर्गों में विभाजित किया गया है।
पोषक तत्व
1. प्राथमिक मुख्य तत्व- नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम
2. द्वितीयक आवश्यक तत्व- कार्बन, गंधक ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, केल्शियम, मैग्नीशियम
3. सूक्ष्म मात्रिक तत्व- लोहा, मैंगनीज, बोरान, जस्ता, ताँबा, मॉलिब्डिनम, निकिल, सोडियम, कोबाल्ट
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