मिट्टी एवं फसलें | soil and crops

हम मुख्यतः भोजन, वस्त्र के लिए कृषि पर निर्भर है। कृषि उपजों व फसलों के लिए मिट्टी एक महत्वपूर्ण कारक है।

मिट्टी एवं फसलें | soil and crops

मिट्टी एवं फसले

हम मुख्यतः भोजन, वस्त्र के लिए कृषि पर निर्भर है। कृषि उपजों व फसलों के लिए मिट्टी एक महत्वपूर्ण कारक है। विभिन्न फसलें तिलहन, पेय पदार्थ, सब्जियाँ, फल, फूल आदि मिट्टी में ही उगाए जाते हैं। भूवैज्ञानिक संरचना, धरातलीय उच्चावच, जलवायु तथा प्राकृतिक वनस्पति की विभिन्नता के कारण भारत के विभिन्न भौगोलिक प्रदेशों में भिन्न-भिन्न प्रकार की मिट्टीयाँ मिलती है। मृदा परिच्छेदिका संस्तरों के विकास तथा जलवायु दशाओं से इनके अंतसंबंध के आधार पर भारत में निम्नलिखित प्रकार की मिट्टी पाई जाती है।

1. जलोढ़ मिट्टी -

यह मिट्टी नदियों द्वारा निक्षेपित महीन गाद से निर्मित होती है। यह मिट्टी भारत के उत्तरी मैदान में गंगा, सतलज व ब्रह्मपुत्र के मैदानों और प्रायद्वीपीय भारत के महानदी, गोदावरी, कृष्णा कावेरी नदियों के डेल्टाई भाग व तटवर्ती क्षेत्रों में मिलती है। उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, पंजाब, असम, राजस्थान व मध्यप्रदेश राज्यों में यह पायी जाती है। इन क्षेत्रों की मुख्य गेहूं चावल, गन्ना, जूट, सरसों, बाजरा आदि है।

2. काली मिट्टी -

यह मिट्टी ज्वालामुखी के लावा निक्षेपण से बनी है, जो मुख्यतः महाराष्ट्र दक्षिणी एवं पूर्वी गुजरात, पश्चिमी मध्यप्रदेश, उत्तरी कर्नाटक, उत्तरी आंध्रप्रदेश आदि राज्यों में पायी जाती है। इस मिट्टी में कपास, मूँगफली, गन्ना, तम्बाकू, दलहन (मूँग, उड़द, अरहर, चना, मटर) तिलहन (सूरजमुखी, तिल, मूँगफली, अरण्डी) आदि फसले होती है।

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3. लाल मिट्टी -

यह मिट्टी आग्नेय शैल से बनी है। यह मिट्टी तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा, दक्षिणी पूर्वी महाराष्ट्र, पूर्वी आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा एवं झारखण्ड में पायी जाती है। यह मिट्टी कम उपजाऊ है, यहाँ पर मोटे अनाज मक्का, ज्वार, धान, कोदों तथा दलहन (मोठ, मूंग, उड़द) एवं तिलहन की कृषि की जाती है।

4. लेटेराइट मिट्टी -

यह मिट्टी कम उपजाऊ होती है। यह मिट्टी पश्चिमी घाट तथा इलायची को पहाड़ियों, पूर्वी घाट व छोटा नागपुर, तमिलनाडु और गुजरात के कुछ भागों में पायी जाती है। इन प्रदेशों में धान तथा दलहन एवं तिलहन, चाय, काजू और रबर की कृषि की जाती है।

5. पर्वतीय मिट्टी -

पर्वतीय प्रदेश में पायी जाने वाली मिट्टी की गहराई बहुत कम होती है। यह मिट्टी मुख्यतः हिमालय क्षेत्र उत्तरी पूर्वी भारत, पहाड़ी क्षेत्री, पश्चिमी एवं पूर्वी घाट व प्रायद्वीपीय भारत में नोलगिरि, सतपुड़ा पहाड़ियों में पायी जाती है। यहाँ पर बागाती फसलों की कृषि जाती है। जिसमें चाय, कहवा, मसाले एवं फल (सेव, अखरोट, नाशपाती, आडू आदि) मुख्य है।

6. मरूस्थलीय मिट्टी -

इस मिट्टी को बलुई मिट्टी भी कहते है। यह मिट्टी पश्चिमी राजस्थान, दक्षिणी पंजाब, दक्षिणी हरियाणा तथा गुजरात में पायी जाती है। इन क्षेत्रों में मोटे अनाज जैसे ज्वार बाजरा, जी, सरसो, चना, कपास, मोठ, लोबिया, मूँग, खजूर, बेर आदि की खेती होती है। लेकिन जहाँ सिंचाई की सुविधा है वहाँ पर गेहूँ की कृषि भी की जाती है।

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